पटना : बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। इस बार विधानसभा का शीतकालीन सत्र पांच दिनों का होगा। सत्र के दौरान सदन में विधायी कार्यों, सरकारी कामकाज, प्रश्नोत्तर और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
सत्र के प्रत्येक दिन के लिए अलग-अलग कार्य निर्धारित किए गए हैं। ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर चर्चा और बहस देखने को मिल सकती है।
30 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलेगा सत्र
बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान विधानसभा और विधान परिषद की कुल पांच बैठकें होंगी। विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, पहले दिन से ही महत्वपूर्ण संसदीय कार्यों की शुरुआत होगी।
5 दिनों का पूरा शेड्यूल: कब क्या होगा?
30 नवंबर, सोमवार : पहला दिन
– सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होगी।
– यदि किसी सदस्य का शपथ ग्रहण बाकी होगा तो उसे पूरा कराया जाएगा।
– राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेशों की प्रमाणित प्रतियां सदन के पटल पर रखी जाएंगी।
– वित्तीय वर्ष 2026-27 का द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरण पेश होगा।
– दिवंगत व्यक्तियों के प्रति शोक प्रकाश किया जाएगा।
1 दिसंबर, मंगलवार : दूसरा दिन
– राजकीय विधेयकों पर चर्चा।
– सरकारी कामकाज और विधायी कार्यों का निष्पादन।
2 दिसंबर, बुधवार : तीसरा दिन
– विभिन्न सरकारी विधेयकों पर चर्चा और प्रक्रिया।
– अन्य राजकीय कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।
3 दिसंबर, गुरुवार : चौथा दिन
– द्वितीय अनुपूरक बजट पर विस्तार से चर्चा।
– बजट पर मतदान कराया जाएगा।
– विनियोग विधेयक पेश कर उस पर संसदीय प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
4 दिसंबर, शुक्रवार : अंतिम दिन
– गैर सरकारी सदस्यों के संकल्पों पर चर्चा।
– विधायकों की ओर से प्रस्तुत संकल्पों पर सदन में विचार होगा।
अनुपूरक बजट पर रहेगी खास नजर
इस शीतकालीन सत्र का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा वित्तीय वर्ष 2026-27 का द्वितीय अनुपूरक बजट होगा। सरकार 30 नवंबर को इसे सदन में पेश करेगी, जबकि 3 दिसंबर को इस पर चर्चा और मतदान होगा। अनुपूरक बजट के माध्यम से सरकार चालू वित्तीय वर्ष में विभिन्न विभागों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि की मंजूरी मांगती है।
विपक्ष भी सरकार को घेरने की करेगा तैयारी
पांच दिनों के इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष महंगाई, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और विकास से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग सकता है। वहीं, सरकार अपनी योजनाओं, नीतियों और विकास कार्यों का पक्ष सदन में रखेगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए भी यह सत्र अहम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि पांच दिनों की कार्यवाही में किन मुद्दों पर सबसे अधिक हंगामा होता है और सरकार विपक्ष के सवालों का किस तरह जवाब देती है।







