वाराणसी, 17 अगस्त : पवित्र सावन मास के तीसरे सोमवार की शाम श्री काशी विश्वनाथ का परम्परानुसार अर्धनारीश्वर श्रृंगार किया गया। शिव भक्त बाबा श्री काशी विश्वनाथ के इस स्वरूप का दर्शन करने के लिए दोपहर बाद से ही कतारबद्ध होने लगे थे। भगवान श्री विश्वेश्वर के पावन ज्योर्तिलिंग का यह श्रृृंगार वैदिक मंत्रोंच्चार के बीच किया गया। सप्तऋषि आरती और भोग आरती के समय बाबा विश्वनाथ का अर्द्धनारीश्वर स्वरूप का दर्शन पाने के लिए श्रद्धालु डटे रहे। बाबा के विग्रह के आधे हिस्से में पुरुष रूपी शिव तो आधे हिस्से में स्त्री रूपी शक्ति स्वरूपा मां का रूप देख श्रद्धालु हर-हर महादेव का उद्घोष करते रहे। इस श्रृंगार से पहले दूध, जल, शहद, दही आदि से बाबा का अभिषेक किया गया। इसके बाद फूलों से श्रृंगार हुआ।
मनु स्मृति में उल्लेख है कि देवाधिदेव महादेव स्वयं को दो भाग में विभक्त किया और उसमें ही अर्द्धनारीश्वर स्वरूप दिखा दिया। बाबा का यह स्वरूप अद्वैत भाव को व्यक्त करता है। खास बात यह है कि साल में सिर्फ सावन मास के तीसरे सोमवार को बाबा विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में अस्थायी प्रतिमा विराजमान कर यह अर्धनारीश्वर श्रृंगार किया जाता है। भगवान शिव का अर्धनारीश्वर रूप शिव और माता पार्वती (शक्ति) का आधा-आधा संयुक्त रूप है, जिसमें दाहिना आधा भाग पुरुष (शिव) और बायां आधा भाग स्त्री (शक्ति) का होता है। यह रूप यह संदेश देता है कि ब्रह्मांड की रचना और संतुलन के लिए पुरुष और स्त्री ऊर्जा दोनों जरूरी और एक दूसरे के पूरक हैं।






