बेगूसराय : बछवाड़ा प्रखंड में सोमवार की सुबह गंगा किनारे जमींदारी बांध टूटने से तीन पंचायतों में बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए। झमटिया के पास ONS चिमनी के पीछे करीब 30 मीटर लंबाई में बांध टूटने के बाद पानी तेज रफ्तार से रानी-1, रानी-2 और रानी-3 पंचायतों की ओर फैल गया। खेतों में पानी भरने के साथ कई इलाकों में घरों तक पानी पहुंचने से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई।
सुबह करीब 3 से 4 बजे टूटा बांध
स्थानीय लोगों के अनुसार, बांध सोमवार तड़के करीब 3 से 4 बजे के बीच टूटा। बांध टूटते ही पानी तेजी से खेतों में फैलने लगा। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में कृषि भूमि जलमग्न हो गई और खेतों में लगी फसलें पानी में डूब गईं।
रानी-1 पंचायत में बांध टूटने का सबसे अधिक असर दिखाई दे रहा है। वहीं रानी-2 पंचायत के कई खेत भी जलमग्न हो चुके हैं। रानी-3 पंचायत में स्थिति गंभीर बताई जा रही है। पानी का तेज बहाव लगातार नए टोले और मोहल्लों की ओर बढ़ रहा है।
मवेशियों और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर ग्रामीण
पानी घरों तक पहुंचने के बाद कई ग्रामीण अपने मवेशियों और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर निकलने लगे हैं। अचानक पानी बढ़ने से लोगों को अपने घर और फसल दोनों की चिंता सताने लगी है।
सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचे
बांध टूटने की सूचना मिलते ही बछवाड़ा सीओ प्रीतम कुमार गौतम, बीडीओ डॉ. अमित कुमार, जल संसाधन विभाग के एसडीओ मनीष कुमार, जेई समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। विभागीय टीम ने टूटे हिस्से की मरम्मत और पानी के बहाव को नियंत्रित करने का काम शुरू कर दिया है।
रात में हुई थी बांध की पेट्रोलिंग
जल संसाधन विभाग के एसडीओ मनीष कुमार के अनुसार, रात करीब 12 से 1 बजे के बीच बांध की पेट्रोलिंग की गई थी। इसके बाद करीब 3 बजे बांध कमजोर होने और पानी का दबाव बढ़ने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई।
एक से दो घंटे में पानी रोकने का दावा
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एक से दो घंटे के भीतर बांध की मरम्मत पूरी कर पानी के बहाव को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, बांध टूटने के बाद तेजी से फैल रहे पानी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
फिलहाल रानी-1, रानी-2 और रानी-3 पंचायतों में ग्रामीणों की नजर प्रशासन और जल संसाधन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि मरम्मत पूरी होने तक पानी कितने इलाके को प्रभावित करेगा और किसानों की फसलों को कितना नुकसान होगा।







