पटना: नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में आई अचानक बाढ़ के बाद बिहार में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। सबसे ज्यादा चिंता गंडक नदी को लेकर है, क्योंकि नेपाल से आने वाला पानी त्रिशूली और नारायणी नदी के रास्ते वाल्मीकिनगर पहुंचता है और इसके बाद बिहार में गंडक के रूप में बहता है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील जिलों में निगरानी और राहत-बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।
1. नेपाल का पानी बिहार तक कैसे पहुंचेगा?
नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के जलप्रवाह में अचानक बढ़ोतरी हुई है। त्रिशूली नदी आगे देवघाट में काली गंडकी से मिलती है और इसके बाद नदी नारायणी कहलाती है। यही नदी भारत में वाल्मीकिनगर के पास गंडक के रूप में प्रवेश करती है।
यानी नेपाल में अचानक बढ़ा पानी सीधे गंडक नदी के जरिए बिहार के मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है। इसी वजह से बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक के किनारे बसे इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
2. गंडक पर कितना पड़ेगा असर?
नेपाल से पानी आने के कारण गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए गंडक बराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं, ताकि पानी के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि नेपाल से आने वाले पानी को वाल्मीकिनगर पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।
इसका सबसे पहला असर पश्चिमी चंपारण के नदी किनारे और निचले इलाकों में देखने को मिल सकता है। इसके बाद गंडक का पानी पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली की ओर असर डाल सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी जिलों में निश्चित रूप से भीषण बाढ़ आएगी। पानी की मात्रा, नदी का जलस्तर, तटबंधों की स्थिति और आगे के बहाव पर स्थिति निर्भर करेगी।
3. किन जिलों में सबसे ज्यादा नजर?
गंडक नदी के संभावित प्रभाव को देखते हुए बिहार के छह जिलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है-
- पश्चिमी चंपारण
- पूर्वी चंपारण
- गोपालगंज
- सारण
- मुजफ्फरपुर
- वैशाली
इन इलाकों में प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। NDRF और SDRF की टीमें भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात की गई हैं।
NDRF-SDRF तैयार, निचले इलाकों से लोगों को हटाया जा रहा
संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
प्रशासन की ओर से तटबंधों और बांधों की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या बिहार में भारी तबाही तय है?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। नेपाल में आई अचानक बाढ़ के कारण बिहार में खतरा जरूर बढ़ा है, लेकिन वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि गंडक में कितना पानी पहुंचता है और कितनी तेजी से जलस्तर बढ़ता है।
इसलिए प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है। नदी, तटबंध और निचले इलाकों के आसपास रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनी पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।







