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पीरपैंती में 2400 मेगावाट पावर प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण तेज, अधिकारियों ने किया स्थलीय निरीक्षण

भागलपुर: जिले के पीरपैंती में प्रस्तावित अडानी पावर लिमिटेड की 2400 मेगावाट ताप विद्युत परियोजना को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। परियोजना से जुड़े रेलवे कॉरिडोर-सह-सड़क निर्माण के लिए आवश्यक भूमि की किस्म और दर का निर्धारण करने के उद्देश्य से अधिकारियों की टीम ने विभिन्न मौजों का स्थलीय निरीक्षण किया।

सात मौजों में पहुंची अधिकारियों की टीम

भूमि की वास्तविक स्थिति और उसकी प्रकृति का आकलन करने के लिए अधिकारियों ने सिकंदरपुर, इमाम नगर, बसंतपुर, चौधरी बसंतपुर, ककरघट, हरिणकोल और महेशराम मौजा का निरीक्षण किया।

टीम ने मौके पर जमीन की स्थिति, उसकी श्रेणी और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी जुटाई। भूमि की किस्म के आधार पर निर्धारित दरों की भी जांच की गई, ताकि आगे की अधिग्रहण प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाया जा सके।

इन अधिकारियों ने किया निरीक्षण

स्थलीय निरीक्षण में अपर समाहर्ता, उप विकास आयुक्त, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड के मुख्य परियोजना अभियंता और कहलगांव के अवर निबंधक शामिल रहे।

अधिकारियों ने जमीन से जुड़े आवश्यक तथ्यों को भी संकलित किया। निरीक्षण के बाद भूमि की किस्म और दर से संबंधित रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।

रेलवे-सड़क कॉरिडोर के लिए होगी जमीन की जरूरत

2400 मेगावाट की इस परियोजना के लिए केवल मुख्य प्लांट ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी रेलवे और सड़क कनेक्टिविटी को भी विकसित किया जाना है। इसके लिए रेलवे कॉरिडोर-सह-सड़क निर्माण के लिए अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।

सरकार ने अप्रैल 2026 में इस कॉरिडोर के लिए करीब 160 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को मंजूरी दी थी।

2400 मेगावाट की होंगी तीन इकाइयां

पीरपैंती में प्रस्तावित पावर प्रोजेक्ट की कुल क्षमता 2400 मेगावाट होगी। इसमें 800-800 मेगावाट की तीन इकाइयां स्थापित की जानी हैं। इसे बिहार की प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है।

परियोजना के पूरा होने से राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

भूमि अधिग्रहण के साथ मुआवजे पर भी फोकस

परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों और भू-स्वामियों के मुआवजे से जुड़े मामलों को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहले से अधिग्रहित भूमि के संबंध में प्रशासन की ओर से भुगतान और लंबित मामलों के निस्तारण पर काम किया जा रहा है।

अधिकारियों का प्रयास है कि भूमि से जुड़े मामलों को समय पर सुलझाकर परियोजना के अगले चरण का काम प्रभावित न हो।

बिहार के ऊर्जा क्षेत्र के लिए अहम परियोजना

पीरपैंती का यह प्रोजेक्ट बिहार में ऊर्जा क्षेत्र के बड़े निवेश के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना से बिजली उत्पादन बढ़ने के साथ निर्माण और संचालन के दौरान प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

भूमि अधिग्रहण और कनेक्टिविटी से जुड़े कार्यों में तेजी के साथ अब परियोजना के धरातल पर आगे बढ़ने की प्रक्रिया भी तेज होती दिखाई दे रही है।

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