मोतिहारी: नवजात बच्चों की कथित खरीद-बिक्री से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा करने का दावा किया है। कार्रवाई के दौरान गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से एक नवजात बच्चे के साथ करीब 12 लाख रुपये नकद और एक वाहन बरामद किया है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा नवजात बच्चों की खरीद-बिक्री का यह सिलसिला कितने समय से चल रहा था।
गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने की कार्रवाई
पुलिस को कथित तौर पर नवजात की खरीद-बिक्री से जुड़े नेटवर्क की जानकारी मिली थी। सूचना के आधार पर टीम ने कार्रवाई करते हुए संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 8 संदिग्धों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। मौके से एक नवजात बच्चे को भी बरामद किया गया, जिसे पुलिस ने सुरक्षित संरक्षण में लिया है।
12 लाख रुपये कैश और वाहन बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में नकदी भी मिली। पुलिस के अनुसार, करीब 12 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इसके अलावा एक वाहन भी जब्त किया गया है।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि बरामद रकम का संबंध कथित नवजात खरीद-बिक्री के लेनदेन से था या नहीं।
कैसे चलता था कथित नेटवर्क?
प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस को आशंका है कि यह मामला किसी संगठित नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। ऐसे नेटवर्क में बिचौलियों के माध्यम से बच्चों के माता-पिता और कथित खरीदारों के बीच संपर्क कराने की भूमिका सामने आ सकती है।
हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों की वास्तविक भूमिका और पूरे नेटवर्क के संचालन का तरीका पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
बरामद नवजात को सुरक्षित रखा गया
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान बरामद नवजात को सुरक्षित संरक्षण में लिया है। बच्चे की पहचान और उसके माता-पिता से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चा कहां से आया था और उसे कथित तौर पर किस उद्देश्य से दूसरे व्यक्ति के पास ले जाया जा रहा था।
आठों आरोपियों से पूछताछ जारी
गिरफ्तार सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में केवल स्थानीय लोग शामिल थे या इसके तार दूसरे जिलों अथवा राज्यों तक भी जुड़े हैं।
पूछताछ के आधार पर पुलिस आगे और गिरफ्तारियां कर सकती है।
क्या पहले भी हुई है ऐसी घटनाएं?
बिहार में इससे पहले भी नवजात और बच्चों की कथित खरीद-बिक्री से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में पुलिस की जांच अक्सर बिचौलियों, निजी अस्पतालों, फर्जी दस्तावेजों और संभावित खरीदारों तक पहुंचती है।
इस मामले में भी पुलिस सभी संभावित कड़ियों की जांच कर रही है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद कई सवाल
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह केवल एक स्थानीय मामला है या इसके पीछे बड़ा नेटवर्क सक्रिय है? बरामद रकम, वाहन और गिरफ्तार लोगों के बीच संबंधों की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।
पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।







