Homeराज्य‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ की होगी शुरुआत, गंगा किनारे बसे...

‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ की होगी शुरुआत, गंगा किनारे बसे बिहार के सभी 12 जिलों में होगा कार्यक्रम

पटना : जदयू प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने प्रेसवार्ता कर ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। प्रेसवार्ता में बिहार विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी और प्रदेश प्रवक्ता नवल शर्मा भी मौजूद रहे।

उमेश सिंह कुशवाहा ने बताया कि 5 सितंबर से ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। गंगा किनारे बसे बिहार के सभी 12 जिलों में चरणबद्ध तरीके से संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसकी शुरुआत बक्सर से होगी, जहां से गंगा बिहार में प्रवेश करती है। वहीं, कार्यक्रम का समापन कटिहार में होगा, जहां से गंगा बंगाल होते हुए बांग्लादेश की ओर जाती है।

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और वे स्वयं आम लोगों, किसानों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद करेंगे। इस दौरान फरक्का जल संधि से जुड़े मुद्दों पर लोगों की राय और सुझाव लिए जाएंगे। जनभावनाओं और सुझावों को उचित मंच पर मजबूती से रखने का काम किया जाएगा।

फरक्का जल संधि अंतरराष्ट्रीय समझौता, लेकिन 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा: उमेश कुशवाहा

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार पिछले 30 वर्षों से फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि की भारी कीमत चुका रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लंबे समय से फरक्का के कारण बिहार को हो रहे नुकसान और राज्य के जल हितों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि यह अंतरराष्ट्रीय समझौता है, लेकिन इसका 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है।

उमेश कुशवाहा ने कहा कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में भारी मात्रा में गाद जमा हो रही है, जिससे नदी की गहराई और जलधारण क्षमता प्रभावित हुई है। इसका असर बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ पर पड़ता है। बाढ़ के कारण किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं और आम जनजीवन भी प्रभावित होता है।

उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि को लेकर जदयू का स्पष्ट रुख है कि इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। यदि संधि का नवीनीकरण होता भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीति सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिसमें बिहार के हितों से किसी भी तरह का समझौता न हो।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments