नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने टेरर फंडिंग मामले के आरोपित और सांसद इंजीनियर रशीद की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए नेशनल इंवेस्टिगेटिव एजेंसी (एनआईए) से पूछा है कि क्या केवल दिल्ली में रहने जैसी कड़ी शर्तों के आधार पर जमानत दी जा सकती है। जस्टिस प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता वाली बेंच ने एनआईए की ओर से पेश वकील से इस सवाल पर निर्देश लेकर आने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से पेश वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि इंजीनियर रशीद के खिलाफ पर्याप्त तथ्य हैं कि उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए। लूथरा ने कहा कि एक बार जब रशीद को जमानत मिली थी तो उन्होंने एक गवाह को प्रभावित करने की कोशिश की थी। इस बात का सबूत कॉल डाटा रिकॉर्ड से मिल सकता है। उन्होंने कहा कि रशीद के खिलाफ गंभीर आरोप हैं कि वे एक राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में एक आतंकी के संपर्क में थे। लूथरा ने कहा कि इस मामले में दो गवाहों के बयान महत्वपूर्ण है। इन दो गवाहों में से एक गवाह संरक्षित गवाह है। तब उच्च न्यायालय ने कहा कि दोनों गवाहों के बयान सुनवाई की अगली तिथि के पहले दर्ज किए जाएं।
इसके पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने रशीद को संसद सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी। कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इंजीनियर रशीद को अपने पिता की मौत के बाद 40वें दिन के रस्म में हिस्सा लेने के लिए 25 जून से 30 जून तक की अंतरिम जमानत दी थी। इंजीनियर रशीद के पिता की 18 मई को एम्स अस्पताल में मौत हो गई थी।
इंजीनियर रशीद ने लोकसभा चुनाव 2024 में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को करीब एक लाख मतों से हराकर जीत हासिल की थी। राशिद इंजीनियर को 2016 में एनआईए ने गिरफ्तार किया था।पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासिन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब अहमद शाह, अवतार अहम शाह, नईम खान, बशीर अहमद बट्ट ऊर्फ पीर सैफुल्ला समेत दूसरे आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। एनआईए के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन, जेकेएलएफ, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू-कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया। 1993 में अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई।
एनआईए के मुताबिक हाफिज सईद ने हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं के साथ मिलकर हवाला और दूसरे चैनलों के जरिये आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन का लेन-देन किया। इस धन का उपयोग वे घाटी में अशांति फैलाने, सुरक्षा बलों पर हमला करने, स्कूलों को जलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का काम किया। इसकी सूचना गृह मंत्रालय को मिलने के बाद एनआईए ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 121, 121ए और यूएपीए की धारा 13, 16, 17, 18, 20, 38, 39 और 40 के तहत केस दर्ज किया था।







