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Bihar News: बिहार में जमीन के रिकॉर्ड होंगे दुरुस्त, मौजावार चलेगा विशेष अभियान; सरकारी जमीन की भी होगी जांच

बिहार में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। अब राज्य में मौजावार विशेष अभियान चलाकर जमाबंदियों का शुद्धीकरण किया जाएगा। इस दौरान पुराने और गड़बड़ रिकॉर्ड की जांच होगी और सरकारी जमीन से जुड़ी जमाबंदियों की स्थिति भी स्पष्ट की जाएगी।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने गुरुवार को अंचलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में अभियान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। पटना के शास्त्रीनगर स्थित राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान में हुई बैठक में बेगूसराय, मधुबनी और जमुई जिले के सभी अंचलाधिकारी शामिल हुए।

अभियान के तहत पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली सरकारी जमीन का प्राथमिकता के आधार पर सत्यापन किया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी प्लॉट से संबंधित जमाबंदियों की भी जांच होगी। अधिकारियों को रिकॉर्ड में दर्ज जमीन और मौके पर मौजूद वास्तविक स्थिति का मिलान करने का निर्देश दिया गया है।

लंबे समय से अटके रिकॉर्ड को भी स्पष्ट करने पर विभाग का विशेष जोर है। लॉक की गई जमाबंदियों को नियमानुसार अनलॉक करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

मृत रैयतों की जमाबंदी पर भी बड़ा फैसला

जमीन के रिकॉर्ड में मृत रैयतों के नाम वर्षों तक दर्ज रहने के मामलों को लेकर विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं। जिन रैयतों की मृत्यु हो चुकी है, उनकी जमाबंदी पुराने नाम पर लंबित नहीं रखी जाएगी।

ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तराधिकार और बंटवारा नामांतरण की कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है। विशेष अभियान के जरिए मृत रैयतों से जुड़े मामलों का निष्पादन किया जाएगा, ताकि वास्तविक उत्तराधिकारियों के नाम जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज हो सकें।

विवादित जमीन की मापी में पारदर्शिता पर जोर

समीक्षा बैठक में विवादित जमीन की मापी को लेकर भी अधिकारियों को विशेष सावधानी बरतने का निर्देश दिया गया। सचिव जय सिंह ने कहा कि राजस्व महाभियान के तहत आने वाले आवेदनों का निपटारा केवल आंकड़े बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि गुणवत्ता के साथ किया जाना चाहिए।

विवादित जमीन की मापी से जुड़े लोगों के फीडबैक को गंभीरता से लेने और पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

फर्जी दस्तावेज देने वालों पर होगी कार्रवाई

दाखिल-खारिज के मामलों में गलत जानकारी देने या गलत प्रश्नावली भरने वालों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी व्यक्ति की ओर से जाली या कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे मामलों में दर्ज प्राथमिकी की स्थिति की भी लगातार निगरानी करने को कहा गया है। यानी अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल आवेदन के निपटारे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों की प्रगति पर भी नजर रखी जाएगी।

क्यों अहम है यह अभियान?

बिहार में जमीन से जुड़े विवादों की बड़ी वजह पुराने रिकॉर्ड, लंबित नामांतरण और सरकारी जमीन से संबंधित प्रविष्टियों का स्पष्ट नहीं होना है। ऐसे में मौजावार स्तर पर जमाबंदियों के शुद्धीकरण का यह अभियान जमीन के रिकॉर्ड को अपडेट करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

विभाग ने अंचल स्तर के अधिकारियों को साफ कर दिया है कि मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब देखना होगा कि इस विशेष अभियान के तहत कितनी जमाबंदियां दुरुस्त होती हैं और वर्षों से लंबित मामलों का कितनी तेजी से निपटारा किया जाता है।

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