पटना : भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि इस मामले में पुलिस से चूक हुई थी। उन्होंने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया और 48 घंटे के भीतर न्यायिक कमेटी का गठन किया गया।
न्यायिक जांच में सामने आई पुलिस की चूक
मुख्यमंत्री के अनुसार, न्यायिक कमेटी की रिपोर्ट में पुलिस की कार्रवाई के दौरान चूक सामने आई। रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को काम करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन यदि पुलिस की ओर से गलती होती है तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई
भरत तिवारी मामले में शुरुआती जांच के बाद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई थी। इससे पहले बिहार पुलिस मुख्यालय ने भी ऑपरेशन को सही तरीके से हैंडल नहीं किए जाने और पुलिस स्तर पर लापरवाही की बात स्वीकार की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, शाहपुर थानाध्यक्ष समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था।
हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज कर रहे हैं जांच
मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच का फैसला लिया था। जांच का उद्देश्य एनकाउंटर से जुड़े सभी पहलुओं और परिस्थितियों की पड़ताल करना है।
परिवार को आर्थिक सहायता और नौकरी का आश्वासन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार भरत तिवारी के परिवार के साथ खड़ी है। परिवार को आर्थिक सहायता देने के साथ एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा भी की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि जांच में किसी की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया पर नजर
भरत तिवारी की मौत का मामला अब न्यायिक जांच और अदालतों की प्रक्रिया तक पहुंच चुका है। न्यायिक आयोग की जांच में घटना से जुड़े पुलिस ऑपरेशन, कार्रवाई की परिस्थितियों और अन्य तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। आयोग की अंतिम रिपोर्ट के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा और स्पष्ट होगी।







