पटना : बिहार की पंचायतों से जुड़ी करीब 1,830 करोड़ रुपये की राशि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बिहार प्रदेश मुखिया महासंघ ने पंचायती राज विभाग से इस राशि के उपयोग और खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। महासंघ का कहना है कि पंचायतों से जुड़े विकास कार्यों में पारदर्शिता जरूरी है और प्रतिनिधियों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि राशि का इस्तेमाल किस मद में और किस स्तर पर हुआ।
पटना में पंचायत प्रतिनिधियों की बैठक
शनिवार को पटना में पंचायत प्रतिनिधियों और विभिन्न प्रखंडों के अध्यक्षों की बैठक हुई। इसमें पंचायतों के विकास कार्य, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विभागीय स्तर पर आ रही समस्याओं पर चर्चा की गई।
बैठक में 1,830 करोड़ रुपये की राशि के हिसाब का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। महासंघ ने पंचायती राज विभाग से राशि के आवंटन, उपयोग और खर्च से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
हिसाब नहीं मिला तो होगा ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन
मुखिया महासंघ ने स्पष्ट किया कि यदि राशि से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई और पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
महासंघ की ओर से ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ कार्यक्रम की चेतावनी भी दी गई है। संगठन का कहना है कि पंचायतों को मिलने वाली राशि के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
इन मुद्दों पर भी उठे सवाल
बैठक में पंचायतों से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी प्रतिनिधियों ने अपनी आपत्तियां और मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से-
- खराब पड़ी सोलर लाइटों का मामला
- पंचायत सरकार भवनों से जुड़े विषय
- कन्या विवाह योजना
- पंचायत सचिवों के स्थानांतरण
- जिला परिषद से जुड़ी राशि और कार्य
- पंचायत प्रतिनिधियों को विभागीय स्तर पर होने वाली परेशानियां
शामिल रहे।
पंचायतों को सहयोग देने की बात
मुखिया महासंघ के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार की विकास योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतों को विभागीय सहयोग मिलने से योजनाओं को बेहतर तरीके से जमीन पर लागू किया जा सकता है।
महासंघ ने यह भी कहा कि पंचायत प्रतिनिधि ‘सेवा संकल्प एवं कायाकल्प’ अभियान*ल में सहयोग करेंगे, लेकिन पंचायतों के अधिकार और वित्तीय संसाधनों से जुड़ी जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए।
अब विभाग के जवाब पर नजर
1,830 करोड़ रुपये को लेकर मुखिया महासंघ की मांग के बाद अब पंचायती राज विभाग के जवाब पर नजर है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में इस राशि के कथित दुरुपयोग की कोई सरकारी पुष्टि सामने नहीं आई है। विवाद मुख्य रूप से राशि के उपयोग और उसके हिसाब को सार्वजनिक करने की मांग को लेकर है।
पंचायतों के वित्तीय संसाधनों को लेकर पारदर्शिता का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र और राज्य स्तर से ग्रामीण स्थानीय निकायों को विकास कार्यों के लिए लगातार राशि उपलब्ध कराई जाती है। फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने बिहार समेत पांच राज्यों के ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 की 15वें वित्त आयोग की दूसरी किस्त के रूप में 3,324 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए थे।







