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PM आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा! बिहार और झारखंड दोनों जगह लिया लाभ, छह परिवारों पर कार्रवाई

जमुई : प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित अनियमितता का एक बड़ा मामला सामने आया है। जमुई जिले के चकाई प्रखंड में छह ऐसे परिवारों की पहचान हुई है, जिन्होंने बिहार के साथ-साथ झारखंड में भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लिया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने संबंधित लाभार्थियों से सरकारी राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

नेशनल मॉनिटरिंग टीम की जांच में खुलासा

जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना की नेशनल मॉनिटरिंग टीम की जांच के दौरान चकाई प्रखंड में यह मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि संबंधित परिवारों ने बिहार के चकाई में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत लाभ लिया, जबकि झारखंड के देवघर में भी प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) के तहत सहायता प्राप्त की।

एक ही परिवार द्वारा दो अलग-अलग राज्यों में आवास योजना का लाभ लेने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। अब लाभार्थियों को योजना के तहत मिली राशि वापस करने के निर्देश दिए गए हैं।

छह पंचायतों के छह लाभार्थी जांच के दायरे में

जांच में चकाई प्रखंड की छह पंचायतों से जुड़े छह लाभार्थियों के नाम सामने आए हैं। इनमें चंद्रमंडीह पंचायत के विनोद राय, माधोपुर की सुगिया देवी, डढ़वा की सांझा देवी, कल्याणपुर की राधा देवी, रामसिंहडीह की प्रभा देवी और कियाजोरी पंचायत के राजेंद्र राम शामिल हैं।

प्रशासन के अनुसार, इन सभी मामलों में बिहार और झारखंड दोनों जगह आवास योजना का लाभ मिलने की जानकारी सामने आई है।

BDO ने आवास सहायकों को दिया वसूली का निर्देश

मामला सामने आने के बाद चकाई के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) मनीष आनंद ने 18 सितंबर को संबंधित पंचायतों के आवास सहायकों को पत्र जारी किया। इसमें लाभार्थियों से सरकारी राशि की वसूली की कार्रवाई तेज करने और वसूल की गई राशि को राज्य खाते में जमा कराने का निर्देश दिया गया।

लाभार्थियों को नोटिस देकर राशि जमा कराने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। प्रशासन का रुख साफ है कि योजना के तहत दोहरा लाभ लेने वालों से सरकारी राशि वापस ली जाएगी।

अभी तक एक लाभार्थी से 45 हजार रुपये की वसूली

प्रशासनिक कार्रवाई शुरू होने के बावजूद अभी तक छह मामलों में केवल एक लाभार्थी से 45 हजार रुपये की वसूली हो सकी है। बाकी पांच मामलों में राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नोटिस के बावजूद यदि संबंधित लाभार्थी राशि वापस नहीं करते हैं तो आगे कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

तीन नोटिस के बाद सर्टिफिकेट केस की तैयारी

BDO के निर्देश के अनुसार, लाभार्थियों को राशि जमा करने के लिए नोटिस दिया जाएगा। यदि तीन नोटिस के बाद भी सरकारी राशि वापस नहीं की जाती है, तो संबंधित लाभार्थियों के खिलाफ सर्टिफिकेट केस दर्ज करने की कार्रवाई की जा सकती है।

डिजिटल सत्यापन व्यवस्था पर भी उठे सवाल

इस मामले ने प्रधानमंत्री आवास योजना की निगरानी और सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। योजना में लाभार्थियों की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज होती है और आधार तथा बैंक खाते जैसी जानकारियां सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। इसके बावजूद एक ही परिवार को दो अलग-अलग राज्यों में योजना का लाभ कैसे मिल गया, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

अब प्रशासन इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि लाभार्थियों के चयन और सत्यापन के दौरान यह दोहरा लाभ पहले क्यों नहीं पकड़ा गया।

राज्य स्तर से मिली सूची के आधार पर कार्रवाई

बताया गया है कि अलग-अलग राज्यों से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने वाले लाभार्थियों की सूची राज्य स्तर से प्रखंड को उपलब्ध कराई गई है। इसी सूची के आधार पर चकाई में मामलों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है।

फिलहाल छह परिवारों का मामला सामने आया है। इनमें से एक से 45 हजार रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि बाकी पांच मामलों में सरकारी राशि की वसूली बाकी है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि राशि वापस नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

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