Homeराज्यचिराग पासवान का जीतन राम मांझी पर निशाना, युवाओं को ‘तेलचट्टा’ कहने...

चिराग पासवान का जीतन राम मांझी पर निशाना, युवाओं को ‘तेलचट्टा’ कहने पर जताई आपत्ति

पटना: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के युवाओं को ‘तेलचट्टा’ कहे जाने वाले बयान पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी राजनीति करने के लिए कुछ भी बोल देते हैं। युवाओं को इस तरह के शब्दों से संबोधित करना उचित नहीं है। चिराग पासवान ने कहा कि नेताओं को बयान देते समय संयम बरतना चाहिए।

युवाओं के आंदोलन पर चिराग पासवान ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमिका है। अगर छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं के आंदोलनों ने समय-समय पर देश की दशा और दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए और अराजकता का माहौल नहीं बनना चाहिए।

चुनाव आयोग के मुद्दे पर भी रखी अपनी बात

चुनाव आयोग और एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर विपक्ष के विरोध पर चिराग पासवान ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष को एसआईआर को लेकर आपत्ति है, तो जिन राज्यों में उसकी सरकार है, वहां उसे अपनी बात सामने रखनी चाहिए। उन्होंने विपक्षी सांसदों से भी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की बात कही।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर चिराग पासवान ने कहा कि हर समस्या का समाधान इस्तीफा नहीं होता। उन्होंने कहा कि अगर इस्तीफा देने से हर समस्या का हल निकलता, तो वह खुद भी कब का इस्तीफा दे चुके होते।

‘सरकार में चौकीदार की भूमिका निभाता हूं’

चिराग पासवान ने कहा कि वह लगातार विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे हैं। उन्होंने कहा कि रामविलास पासवान की राजनीतिक सोच के अनुरूप लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात उठाना जरूरी है। चिराग ने कहा कि केंद्र सरकार के सामने भी उन्होंने कई विषयों पर सवाल रखे हैं और सरकार में वह चौकीदार की भूमिका निभाते हैं।

युवाओं के वोट चोरी के आरोपों को लेकर हो रहे प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि युवाओं को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, देश के युवाओं ने समय-समय पर आंदोलनों के माध्यम से बदलाव की दिशा तय की है।

चिराग पासवान ने एक बार फिर शांतिपूर्ण आंदोलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments