पटना : बिहार की राजधानी पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब आठ महीने की जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। अब इस रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान विशेष पॉक्सो अदालत ने जांच के तरीके और कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए हैं। अदालत ने CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पर नाराजगी जताई है।
इस मामले में छात्रा के परिजनों ने शुरू से ही निष्पक्ष जांच की मांग की है। CBI की क्लोजर रिपोर्ट में पर्याप्त ठोस सबूत नहीं मिलने की बात कही गई है। हालांकि, रिपोर्ट पर अदालत की सुनवाई के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर क्यों उठे सवाल?
CBI ने लगभग आठ महीने की जांच के बाद अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। जांच एजेंसी के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त ठोस सबूत नहीं मिल सके। जांच के दौरान करीब 30 लोगों के DNA सैंपल भी लिए गए, लेकिन किसी का DNA कथित तौर पर मिले जैविक साक्ष्य से मेल नहीं खाया।
रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच के विभिन्न पहलुओं पर सवाल किए। विशेष रूप से CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों को जुटाने तथा उनकी जांच की प्रक्रिया पर चिंता जताई गई। अदालत की नाराजगी के बाद अब जांच एजेंसी की कार्रवाई और शुरुआती जांच में अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शंभू गर्ल्स हॉस्टल में बेहोश मिली थी छात्रा
यह मामला पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल का है, जहां जहानाबाद की रहने वाली छात्रा NEET की तैयारी कर रही थी। जानकारी के मुताबिक, 6 जनवरी 2026 को छात्रा अपने कमरे में बेहोश मिली थी। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद छात्रा के परिजनों ने उसकी मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए और गंभीर आरोप लगाए। परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद मामले की जांच बिहार पुलिस ने शुरू की और बाद में विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई।
पहले बिहार पुलिस की SIT, फिर CBI को मिली जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार पुलिस की SIT ने जांच की। बाद में राज्य सरकार ने जांच की जिम्मेदारी CBI को सौंप दी। केंद्रीय एजेंसी ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और विभिन्न पहलुओं की जांच की, लेकिन करीब आठ महीने बाद भी किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कहते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी।
हालांकि, क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने मामले को समाप्त कर दिया है। रिपोर्ट को स्वीकार करना, अस्वीकार करना या आगे की जांच का निर्देश देना अदालत के अधिकार क्षेत्र में है।
अब आगे क्या होगा?
इस मामले में अदालत की अगली सुनवाई 6 नवंबर को निर्धारित होने की जानकारी सामने आई है। आगे की सुनवाई में CBI की क्लोजर रिपोर्ट और जांच से जुड़े सवालों पर विचार किया जा सकता है।
फिलहाल, छात्रा की मौत के मामले में अंतिम न्यायिक निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में अदालत की आगे की कार्रवाई और परिजनों के पक्ष को सुनने के बाद ही मामले की अगली दिशा स्पष्ट होगी।







