पटना : बिहार में क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में पटना विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में राजनीति विज्ञान की 3,800 शब्दावलियों को मैथिली भाषा में मानकीकृत करने पर सहमति बनी है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए राजनीति विज्ञान से जुड़े कठिन विषयों और अवधारणाओं को अपनी भाषा में समझना आसान बनाना है।
यह कार्यशाला 12 से 16 अक्टूबर 2026 तक आयोजित की गई थी। इसका आयोजन शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग (CSTT), नई दिल्ली के तत्वावधान में किया गया। कार्यशाला में राजनीति विज्ञान की अंग्रेजी और हिंदी में प्रचलित मूलभूत शब्दावलियों के उपयुक्त मैथिली रूप निर्धारित करने पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। चयनित शब्दावली के प्रकाशन की भी योजना है।
मैथिली में पढ़ाई और शोध को मिलेगा बढ़ावा
राजनीति विज्ञान जैसे विषयों में लोकतंत्र, संप्रभुता, संविधान, न्यायपालिका, शासन व्यवस्था और राजनीतिक सिद्धांत जैसी अनेक अवधारणाएं शामिल होती हैं। इनसे संबंधित तकनीकी शब्दों को समझने में विद्यार्थियों को कई बार कठिनाई होती है, खासकर तब जब अध्ययन की भाषा उनकी सहज भाषा से अलग हो।
ऐसे में मैथिली में मानकीकृत शब्दावली उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को विषय की अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही शिक्षकों को अध्यापन सामग्री तैयार करने और शोधार्थियों को अपनी भाषा में अकादमिक लेखन करने में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
पटना विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. सीमा प्रसाद ने कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग विभिन्न विषयों की मानकीकृत शब्दावलियां हिंदी सहित भारतीय भाषाओं में विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। राजनीति विज्ञान की मूलभूत शब्दावली का मैथिली में विकास उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, प्रभावी और रोजगारोन्मुखी बनाने की दिशा में उपयोगी कदम है।
अंग्रेजी-हिंदी-मैथिली में तैयार होगी शब्दावली
इस पहल के तहत राजनीति विज्ञान से संबंधित अंग्रेजी और हिंदी के शब्दों के लिए उपयुक्त मैथिली समकक्ष निर्धारित किए गए हैं। इसका उद्देश्य विषयगत शब्दों के इस्तेमाल में एकरूपता लाना है, ताकि अलग-अलग शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों और शिक्षकों को समान अवधारणाओं के लिए स्पष्ट एवं मान्य शब्द उपलब्ध हो सकें।
कार्यशाला के संयोजक एवं विषय विशेषज्ञ डॉ. राकेश रंजन ने भारतीय भाषाओं में ज्ञान-विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए इसे महत्वपूर्ण प्रयास बताया। विशेषज्ञों ने भाषा की सहजता के साथ-साथ शब्दों की विषयगत सटीकता और उपयुक्तता पर भी ध्यान दिया।
शब्दावली के मानकीकरण से भविष्य में पाठ्य सामग्री, संदर्भ पुस्तकों, अकादमिक लेखन और शोध कार्यों में मैथिली के उपयोग को बढ़ावा देने का रास्ता खुल सकता है।
वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग की भूमिका
वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग वर्ष 1961 से भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली के निर्माण, विकास तथा मानकीकरण का कार्य कर रहा है। आयोग का उद्देश्य विभिन्न विषयों के लिए ऐसी शब्दावलियां विकसित करना है, जिनका उपयोग शिक्षा, अनुसंधान और अकादमिक गतिविधियों में किया जा सके।
आयोग के सहायक निदेशक डॉ. शहजाद अहमद अंसारी ने कार्यशाला के आयोजन में सहयोग के लिए विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि आयोग की वेबसाइट पर विभिन्न विषयों की द्विभाषी और त्रिभाषी शब्दावलियां तथा परिभाषा शब्दकोश संदर्भ के लिए उपलब्ध हैं।
इच्छुक विद्यार्थी और शिक्षक आयोग की आधिकारिक वेबसाइट https://shabd.education.gov.in/ पर उपलब्ध सामग्री देख सकते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से भी जुड़ी है पहल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषाओं के माध्यम से शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है। क्षेत्रीय भाषाओं में विषयगत शब्दावली विकसित करना इस दिशा में सहायक हो सकता है, क्योंकि इससे विद्यार्थियों को जटिल विषयों को अपनी परिचित भाषा में समझने और अभिव्यक्त करने का अवसर मिलता है।
मैथिली में राजनीति विज्ञान की मानकीकृत शब्दावली तैयार करने की यह पहल बिहार सहित उन क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकती है, जहां मैथिली का व्यापक भाषायी और सांस्कृतिक महत्व है।
हालांकि, मानकीकृत शब्दावली पर सहमति बनने के बाद इसके प्रकाशन, शैक्षणिक उपयोग और पाठ्यक्रमों में शामिल किए जाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इससे यह तय होगा कि विद्यार्थी और शिक्षक इस पहल का लाभ किस स्तर पर और किस रूप में उठा सकेंगे।
क्षेत्रीय भाषा में उच्च शिक्षा की दिशा में अहम कदम
पटना विश्वविद्यालय की इस पहल से मैथिली को अकादमिक विमर्श और उच्च शिक्षा में अधिक व्यवस्थित स्थान दिलाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। राजनीति विज्ञान की शब्दावली का मानकीकरण न केवल विद्यार्थियों के लिए विषय को समझना आसान बना सकता है, बल्कि मैथिली में शैक्षणिक लेखन और शोध सामग्री के विकास को भी प्रोत्साहित कर सकता है।
अब इस पहल का अगला महत्वपूर्ण चरण तैयार शब्दावली का प्रकाशन और शैक्षणिक संस्थानों तक उसकी पहुंच सुनिश्चित करना होगा। इससे क्षेत्रीय भाषा में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों को नई दिशा मिल सकती है।







