नालंदा : हिलसा को जाम की समस्या से राहत दिलाने के लिए पूर्वी बाइपास का निर्माण कार्य जारी है। करीब 206.03 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत 7.07 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जा रही है। इसके साथ दो रेल ओवर ब्रिज (ROB) और 15 छोटे-बड़े पुल-पुलियों का निर्माण भी शामिल है। बाइपास तैयार होने के बाद शहर के व्यस्त बाजार क्षेत्र में यातायात का दबाव कम होने और आसपास के इलाकों से कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
सड़क से लेकर पुल-पुलियों तक निर्माण कार्य जारी
हिलसा पूर्वी बाइपास परियोजना के तहत सड़क निर्माण के लिए मिट्टी भराई, पुल-पुलियों और अन्य संरचनाओं का काम किया जा रहा है। उपलब्ध परियोजना प्रगति विवरण के अनुसार, करीब 4.5 किलोमीटर हिस्से में मिट्टी भराई का काम दर्ज किया गया है। कुछ पुल-पुलियों और छोटे पुलों का निर्माण भी आगे बढ़ रहा है। पथ निर्माण विभाग की ओर से परियोजना की प्रगति से जुड़ी जानकारी साझा की गई है।
पहले और सातवें किलोमीटर पर बनेंगे दो रेल ओवर ब्रिज
इस परियोजना की बड़ी खासियत दो रेल ओवर ब्रिज का निर्माण है। ये पहले और सातवें किलोमीटर पर बनाए जाएंगे। इनके तैयार होने से रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेनों के गुजरने के दौरान वाहनों को रुकने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। इससे बाइपास पर आवागमन सुगम हो सकेगा।
कामता हाल्ट के दक्षिण से शुरू होगा बाइपास
प्रस्तावित बाइपास दनियावां-गया स्टेट हाईवे-4 पर कामता हाल्ट के दक्षिण से शुरू होकर ढिबरापर रेलवे क्रॉसिंग के पास जुड़ेगा। रास्ते में यह हिलसा-नूरसराय सड़क को लालसे बिगहा मोड़ के निकट क्रॉस करेगा। इस नए मार्ग का उद्देश्य शहर के भीतर से गुजरने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराना है, जिससे बाजार क्षेत्र में जाम की समस्या कम हो सके।
छह मौजों की 47 एकड़ से अधिक जमीन का अधिग्रहण
बाइपास निर्माण के लिए कामता, मोमिन्दपुर, मियां बिगहा, हिलसा, इंदौत और मई मौजों की कुल 47.385 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों को करीब 1.47 अरब रुपये का मुआवजा दिया गया है। वहीं, रेल ओवर ब्रिज से संबंधित भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर वर्ष 2026 में भी जिला प्रशासन की ओर से सूचनाएं जारी की गई हैं।
2007 में बनी थी योजना, अब निर्माण पर टिकी नजरें
हिलसा पूर्वी बाइपास की योजना वर्ष 2007 में प्रस्तावित हुई थी और 2012 में इसे स्वीकृति मिली थी। वर्ष 2019 में शिलान्यास के बाद भी परियोजना लंबे समय तक अटकी रही। बाद में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड की ओर से निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। तकनीकी मूल्यांकन में ओडिशा की मेसर्स फॉर्च्यून ग्रुप और बेगूसराय की हरि कंस्ट्रक्शन एंड एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड को काम के लिए उपयुक्त पाया गया था।
2028 तक पूरा करने का लक्ष्य, फिर मिलेगी जाम से राहत
परियोजना ट्रैकर के अनुसार, निर्माण कार्य पूरा करने की निर्धारित तिथि 9 जनवरी 2028 है। फिलहाल निर्माण कार्य जारी है और बाइपास पूरी तरह तैयार होने के बाद ही इस पर आवागमन शुरू हो सकेगा। समय पर निर्माण पूरा होना आगे के कार्यों की प्रगति पर निर्भर करेगा।
बाइपास तैयार होने से हिलसा के बाजार क्षेत्र में वाहनों का दबाव कम होने, आसपास के इलाकों से संपर्क बेहतर बनने और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि वर्षों से प्रतीक्षित यह परियोजना कब पूरी होती है और शहर को जाम से कितनी राहत मिलती है।







