Homeराज्यबिहार में प्रेशर हॉर्न पर सख्ती, गाड़ी में लगा है तेज आवाज...

बिहार में प्रेशर हॉर्न पर सख्ती, गाड़ी में लगा है तेज आवाज वाला हॉर्न तो हो जाएं सावधान

पटना : बिहार में प्रेशर हॉर्न और तेज आवाज वाले मल्टी-टोन हॉर्न के इस्तेमाल पर परिवहन विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। ऐसे हॉर्न का इस्तेमाल करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने प्रतिबंधित हॉर्न बेचने वाली दुकानों पर भी छापेमारी और उपकरणों को जब्त करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य सड़कों पर ध्वनि प्रदूषण को कम करना और आम लोगों को तेज आवाज से होने वाली परेशानी से राहत दिलाना है।

बिहार में प्रेशर हॉर्न पर क्यों हुई सख्ती?

बिहार परिवहन विभाग ने जून 2026 में प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न और मल्टी-टोन हॉर्न के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की थी। इसके तहत वाहनों की जांच के साथ-साथ ऐसे हॉर्न बेचने वाली दुकानों पर भी कार्रवाई करने की बात कही गई।

विभाग के अनुसार, निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज करने वाले हॉर्न का इस्तेमाल मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय है। स्कूल बसों और शैक्षणिक संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की भी जांच की जा सकती है।

गाड़ी में प्रेशर हॉर्न मिला तो क्या होगा?

अगर किसी वाहन में प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न या तेज आवाज वाला मल्टी-टोन हॉर्न लगा मिलता है, तो संबंधित अधिकारियों की ओर से कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे उपकरणों को जब्त करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

प्रतिबंधित हॉर्न बेचने वाले दुकानदारों पर भी कार्रवाई हो सकती है। इसलिए वाहन मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने वाहनों में इस्तेमाल होने वाले हॉर्न की जांच कर लें और नियमों के विपरीत लगे उपकरणों को हटवा दें।

रात 9:55 बजे के बाद हॉर्न और तेज आवाज पर क्या नियम हैं?

पटना हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सख्त निर्देश दिए। अदालत ने रात 9:55 बजे के बाद तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम और प्रेशर हॉर्न पर प्रतिबंध के प्रभावी पालन पर जोर दिया है। अस्पतालों और स्कूलों के आसपास साइलेंस जोन के नियमों को भी लागू करने का निर्देश दिया गया है।

इसका मकसद मरीजों, बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों को अनावश्यक शोर से बचाना है। वाहन चालकों को साइलेंस जोन में हॉर्न बजाने से बचना चाहिए और निर्धारित ध्वनि मानकों का पालन करना चाहिए।

वाहन चालकों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

  • गाड़ी में प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न या गैर-अनुमत मल्टी-टोन हॉर्न न लगवाएं।
  • जरूरत न होने पर लगातार हॉर्न न बजाएं।
  • अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास साइलेंस जोन के नियमों का पालन करें।
  • वाहन में लगे हॉर्न की जांच कराएं और जरूरत पड़ने पर उसे मानक हॉर्न से बदलवाएं।
  • प्रतिबंधित हॉर्न की खरीद-बिक्री से बचें।

ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाने की तैयारी

बिहार में प्रेशर हॉर्न के खिलाफ कार्रवाई का उद्देश्य केवल यातायात नियमों का पालन कराना नहीं है, बल्कि ध्वनि प्रदूषण को कम करना भी है। तेज आवाज से अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को परेशानी होती है।

ऐसे में वाहन चालकों के लिए जरूरी है कि वे हॉर्न का इस्तेमाल केवल आवश्यकता के अनुसार करें और यातायात नियमों का पालन करें।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments