सारण : बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बीच सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से बड़ी खबर सामने आई है। निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. राहुल राज ने जीत दर्ज कर ली है। बीजेपी से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे राहुल राज की जीत को इस सीट पर बड़ा सियासी उलटफेर माना जा रहा है। चुनाव में उन्होंने एनडीए समर्थित जेडीयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर समेत अन्य प्रत्याशियों को चुनौती दी।
BJP से बगावत कर निर्दलीय लड़े राहुल राज
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में डॉ. राहुल राज का मुकाबला जेडीयू के आनंद पुष्कर, जन सुराज समर्थित आफाक अहमद और राजद के प्रोफेसर जयराम यादव समेत कई उम्मीदवारों से था।
राहुल राज बीजेपी से जुड़े रहे थे, लेकिन एनडीए के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने के कारण पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बावजूद उन्होंने चुनावी मैदान में अपनी दावेदारी कायम रखी।
पहली वरीयता के मतों में भी बनाई थी बढ़त
मतगणना के दौरान राहुल राज ने पहली वरीयता के मतों में बढ़त बनाई थी। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, उन्हें 2,723 वोट मिले थे, जबकि जेडीयू उम्मीदवार आनंद पुष्कर को 2,440 वोट प्राप्त हुए थे।
हालांकि, पहली वरीयता के मतों में कोई भी उम्मीदवार जीत के लिए जरूरी मतों का आंकड़ा हासिल नहीं कर पाया था। इसके बाद दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के आधार पर परिणाम तय किया गया।
एनडीए के लिए क्यों अहम है यह नतीजा?
सारण शिक्षक सीट पर राहुल राज की जीत इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह एनडीए के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे। बीजेपी से जुड़े रहे एक नेता का निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीतना गठबंधन के चुनावी प्रबंधन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर सवाल खड़े करता है।
इस चुनाव में एनडीए के भीतर असंतोष और बागी उम्मीदवारों की सक्रियता भी चर्चा का विषय रही। राहुल राज की जीत से यह संकेत मिलता है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में स्थानीय समीकरण और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ भी अहम भूमिका निभा सकती है।
बिहार MLC चुनाव में दिलचस्प हुए मुकाबले
बिहार विधान परिषद की चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की कुल आठ सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। 27 अक्टूबर को मतगणना के दौरान अलग-अलग सीटों पर एनडीए, महागठबंधन, जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच मुकाबला देखने को मिला।
सारण शिक्षक सीट पर राहुल राज की जीत ने चुनाव परिणामों को और दिलचस्प बना दिया है। बीजेपी से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरने के बाद उनकी सफलता अब बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।







