लखीसराय जिला पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में जिला परिषद सभागार, लखीसराय में “विकसित भारत के लिए 125 दिन ग्रामीण रोजगार की नई गारंटी” विषय पर दो दिवसीय पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त श्री सुमित कुमार एवं NEP के निदेशक श्री नीरज आनंद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत नई ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था से संबंधित वीडियो प्रदर्शन के साथ हुई, जिसके बाद विषय पर विस्तृत परिचर्चा आयोजित की गई।
जिला पदाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम लागू होने के बाद ग्रामीण परिवारों को पहली बार रोजगार का कानूनी अधिकार मिला। बीते लगभग 20 वर्षों में मनरेगा ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आधारभूत संरचना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विशेषकर कोविड-19 महामारी के दौरान गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने और उनकी आजीविका को संबल देने में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण रोजगार योजनाओं का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, सिंचाई सुविधाओं का विकास, तालाब एवं पोखरों का जीर्णोद्धार, पौधारोपण, खेल मैदान, विद्यालयों की आधारभूत संरचना तथा अन्य टिकाऊ एवं जनोपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण भी है। इन्हीं उद्देश्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप नई ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था लागू की गई है।
जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था पूर्व की योजनाओं का स्थान नहीं लेती, बल्कि उनके सफल प्रावधानों को आगे बढ़ाते हुए आवश्यक सुधारों के साथ लागू की गई है। कृषि कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए 60 दिनों का “लीव पीरियड” निर्धारित किया गया है तथा रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। इससे ग्रामीण श्रमिकों को अधिक रोजगार मिलेगा और कृषि कार्यों के लिए श्रमिकों की उपलब्धता भी बनी रहेगी।
उन्होंने बताया कि अब योजनाओं के लिए संसाधनों का आवंटन राज्यों की वास्तविक आवश्यकता एवं स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना, आईसीडीएस, पंचायती राज, शिक्षा विभाग एवं अन्य योजनाओं के साथ बेहतर अभिसरण (कन्वर्जेंस) स्थापित कर गुणवत्तापूर्ण एवं स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत सरकारी विद्यालयों में चारदीवारी, छात्र-छात्राओं के लिए पृथक शौचालय, रसोई शेड, अतिरिक्त कक्षों की मरम्मत, ग्रामीण हाट-बाजार का विकास, पंचायत स्तर पर जल निकासी व्यवस्था, मुक्तिधाम, तालाब एवं पोखरों का विकास, पौधारोपण, जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल एवं जीआईएस आधारित योजना निर्माण के माध्यम से विकास कार्यों का पारदर्शी एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।
अंत में जिला पदाधिकारी ने सभी मुखिया, पंचायत प्रतिनिधियों एवं संबंधित अधिकारियों से आह्वान किया कि वे योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार तक समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पहुंचाना सुनिश्चित करें।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त सुमित कुमार, NEP के निदेशक नीरज आनंद, जिला शिक्षा पदाधिकारी यदुवंश राम, सभी जिला परिषद सदस्य एवं जिले के सभी मुखिया उपस्थित रहे।

