Homeदेशआलू संकट से किसान परेशान, नई सरकार से राहत की उम्मीद

आलू संकट से किसान परेशान, नई सरकार से राहत की उम्मीद

पश्चिम मेदिनीपुर, 07 अगस्त  पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोणा क्षेत्र में आलू किसान, व्यापारी और शीतगृह संचालक गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। आलू का उचित मूल्य नहीं मिलने और शीतगृहों में भारी मात्रा में भंडारण होने से सभी वर्ग चिंतित हैं। अब उन्हें नई राज्य सरकार से राहत की उम्मीद है।

किसानों ने बताया कि मार्च में आलू की अच्छी पैदावार हुई थी, लेकिन अधिक उत्पादन के कारण उन्हें उचित कीमत नहीं मिली। कई किसानों ने खेती के लिए ऊंचे ब्याज पर ऋण लिया था या आभूषण गिरवी रखे थे। फसल का दाम नहीं मिलने से आर्थिक संकट गहरा गया। इसी तनाव में मार्च के दौरान चंद्रकोणा क्षेत्र के दो किसानों की मौत भी हुई थी, जिससे इलाके में चिंता का माहौल बन गया था।

किसानों का कहना है कि बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में उन्होंने अधिक किराया देकर आलू शीतगृहों में रखा था, लेकिन अब शीतगृह से आलू केवल साढ़े पांच से छह रुपये प्रति किलोग्राम के भाव बिक रहा है। जबकि खुदरा बाजार में यही आलू 10 से 12 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है। किसानों का आरोप है कि इसका लाभ बिचौलियों को मिल रहा है, जबकि उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आलू व्यापारियों का कहना है कि वे शीतगृह से सीधे आलू नहीं खरीद सकते। उन्हें बिचौलियों के माध्यम से खरीदारी करनी पड़ती है, जिससे लागत बढ़ जाती है और पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है।

शीतगृह (कोल्ड स्टोर) संचालकों और व्यापारियों के अनुसार, पहले पश्चिम बंगाल का आलू बिहार, ओडिशा और झारखंड सहित कई राज्यों में भेजा जाता था। उनका आरोप है कि पिछले वर्षों में दूसरे राज्यों को आलू भेजने पर लगी रोक के कारण बंगाल ने अपना बड़ा बाजार खो दिया। अब नई सरकार ने इस रोक को हटा दिया है और किसानों तथा व्यापारियों को राहत देने का भरोसा भी दिया है।

हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि दूसरे राज्यों में आलू भेजने के लिए परिवहन सहायता या अन्य सुविधाओं को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट सरकारी निर्देश जारी नहीं हुआ है। इससे शीतगृहों में रखा आलू समय पर नहीं निकल पा रहा है।

शीतगृह संचालकों के अनुसार, चंद्रकोणा के शीतगृहों में रखा केवल 30 प्रतिशत आलू ही बिक पाया है, जबकि 70 प्रतिशत आलू अब भी भंडारित है। सरकारी नियमों के अनुसार दिसंबर तक शीतगृह खाली करना आवश्यक होता है, ताकि जनवरी और फरवरी में मरम्मत के बाद मार्च से नई फसल का भंडारण किया जा सके। ऐसे में किसानों, व्यापारियों और शीतगृह संचालकों की नजर अब नई सरकार के अगले कदम पर टिकी है।

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