नई दिल्ली, 07 अगस्त 
प्रधानमंत्री मोदी के एक्स हैंडल पर इसका अर्थ बताया गया है, ”चंद्रमा किसी प्रत्युपकर इच्छा से अपनी किरणों द्वारा कुमुदनी को प्रकाशित नहीं करता। अपितु यह उसका स्वाभाविक गुण है। उसी प्रकार महान और उदार हृदय सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते हैं, क्योंकि परोपकार उनके स्वभाव में होता है।”
सुभाषितम् के रूप में साझा किया गया यह श्लोक महान कवि भवभूति का है। इसका उल्लेख रसिकलक्षण अर्थात रसिकजीवन, शाङ्गधरपद्धति और सुभाषितरत्नभाण्डागारम् में मिलता है।