Homeराज्यबिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर का 17वाँ स्थापना दिवस मनाया गया, मौके पर...

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर का 17वाँ स्थापना दिवस मनाया गया, मौके पर बोले मत्री श्रवण कुमार, कहा- बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने संकल्प,निष्ठा और समर्पण के साथ अल्प अवधि में लंबी उपलब्धियों का सफर तय किया

भागलपुर- 05 अगस्त। बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर का 17वाँ स्थापना दिवस बुधवार को बड़े ही हर्षाेल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर पूरे विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह एवं चहल-पहल का वातावरण रहा। स्थापना दिवस समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के कर्पूरी सभागार में किया गया।

समारोह में बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति सैयद अता हसनैन आभासी माध्यम से मुख्य अतिथि के रूप में जुड़े। कार्यक्रम में बिहार सरकार केकृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा भी आभासी माध्यम से शामिल हुए। वहीं सभागार में बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं सूचना-जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार, भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल एवं कहलगाँव के विधायक शुभानंद मुकेश विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजुद थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुई। कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने संदेश में कृषि शिक्षा,अनुसंधान, नवाचार एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने तथा बिहार की कृषि को अधिक समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर पिछले 16 वर्षों से कृषि अनुसंधान,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा किसानोन्मुखी तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान भविष्य में भी कृषि क्षेत्र में नवाचार और किसान कल्याण के नए आयाम स्थापित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि ष्समृद्ध किसान ही समृद्ध बिहार और विकसित भारत की सबसे मजबूत आधारशिला हैं।

ग्रामीण विकास एवं सूचना-जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि 16 वर्ष कोई बहुत लंबा समय नहीं होता, लेकिन संकल्प, निष्ठा और समर्पण के साथ अल्प अवधि में भी लंबी उपलब्धियों का सफर तय किया जा सकता है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियाँ उसकी आयु से कहीं अधिक बड़ी हैं।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि आज हम केवल सत्रहवाँ स्थापना दिवस नहीं मना रहे हैं, बल्कि उस संकल्प की समीक्षा भी कर रहे हैं, जो बिहार की धरती, उसके किसानों, उसके युवाओं तथा कृषि के भविष्य को विरासत में प्राप्त करने वाली आने वाली पीढ़ियों से किया गया था। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस केवल किसी संस्थान के इतिहास की एक तिथि नहीं होता, बल्कि यह आत्ममंथन का अवसर होता है कि हमने कितने लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया, कितने नए अवसरों का सृजन किया, कितने वैज्ञानिक नवाचारों को खेतों तक पहुँचाया तथा अपने विद्यार्थियों को समाज और कृषि की सेवा के लिए कितनी प्रभावी ढंग से तैयार किया। उन्होंने बिहार कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों के प्रति भी अपनी हार्दिक सराहना व्यक्त की, जो देश-विदेश में अपनी उपलब्धियों के माध्यम से अपनी मातृसंस्था के ज्ञान, मूल्यों और गौरव को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments