जयपुर, 08 अगस्त : पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत क्रम-1, महानगर प्रथम ने नाबालिग बेटी को वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेल कर एक व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज कराने वाली मां और दो अन्य मीरा उर्फ मीना व विकास को बीस-बीस साल की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों अभियुक्तों पर जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने एक अन्य महिला को दोषमुक्त कर दिया है।
पीठासीन अधिकारी मीना अवस्थी ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्तों ने नाबालिग पीडिता को अपने अपने निवास स्थान और अन्य स्पा सेंटरों पर ग्राहकों को उपलब्ध करवाकर उससे वैश्यावृत्ति जैसा घिनौना कृत्य करवाकर धन प्राप्त किया। ऐसे में अभियुक्तों के प्रति नरमी का रुख नहीं अपनाया जा सकता।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुरेन्द्र सिंह राजावात ने अदालत को बताया कि घटना को लेकर पीडिता की मां ने 20 जून, 2025 को प्रताप नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि उसकी 16 साल की बेटी को राज नाम का व्यक्ति बहला फुसला कर ले गया है। उस अश्लील वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म करता है। बीती रात से बेटी उसके कब्जे में है। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया। इस दौरान कुछ अन्य के खिलाफ जांच लंबित रखी गई। पीडिता ने अपने बयानों में बताया कि उससे वेश्यावृत्ति कराई जाती थी। उसे अलग-अलग घरों में रखकर ग्राहकों को बुलाकर और उसे स्पा सेंटरों पर भेजकर वेश्यावृत्ति कराई जाती है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अभियुक्तों सजा सुनाते हुए अर्थदंड से दंडित किया है।

