बिहार सरकार द्वारा जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाने के फैसले के विरोध में लखीसराय जिला निबंधन कार्यालय में 3 अगस्त से कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। सरकार की इस नई व्यवस्था के खिलाफ कातिब (दस्तावेज नवीस) और स्टांप विक्रेताओं ने मोर्चा खोल दिया है और पुरानी व्यवस्था को बहाल करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे कातिबों और स्टांप विक्रेताओं का स्पष्ट कहना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से उनकी भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी।
कातिबों की चिंता: नई व्यवस्था के बाद दस्तावेज तैयार करने का काम खत्म हो जाएगा।
ऑनलाइन व्यवस्था से स्टांप बिक्री घटेगी, जिससे कमाई का जरिया बंद हो जाएगा।
इस पेशे पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर हजारों परिवारों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
रजिस्ट्री ऑफिस में काम पूरी तरह ठप रहने के कारण दूर-दराज से पहुंचे आम नागरिकों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कई लोग दूर-दराज के इलाकों से जरूरी दस्तावेज लेकर जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचे थे, लेकिन कार्यालय में ताला लटके होने और कामकाज ठप रहने के कारण उन्हें निराश होकर बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा। इससे लोगों में भारी आक्रोश है।
निबंधन कार्य लगातार ठप रहने से राज्य सरकार को भी रोजाना लाखों रुपये के राजस्व (Revenue) का भारी नुकसान हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने हुंकार भरते हुए कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती और पुरानी व्यवस्था बहाल नहीं करती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो इस आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा।
फिलहाल, लखीसराय जिला निबंधन कार्यालय में सन्नाटा पसरा है और सभी प्रकार के रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह से ठप हैं।
फिलहाल, लखीसराय जिला निबंधन कार्यालय में सन्नाटा पसरा है और सभी प्रकार के रजिस्ट्री कार्य पूरी तरह से ठप हैं।

