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नेपाल के सांप्रदायिक दंगे में आईएसआई की संदिग्ध भूमिका का खुफिया रिपोर्ट में खुलासा

काठमांडू, 14 अगस्त : नेपाल के सुनसरी जिले में 26 जुलाई की रात को शुरू हुए सांप्रदायिक दंगों के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की संलग्नता होने की बात सामने आई है।

नेपाल के गृह मंत्रालय को देश की खुफिया एजेंसी राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग (एनआईडी) की तरफ से सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। दंगे के समय टर्की और बांग्लादेश से आए कुछ मौलानाओं की भारतीय सीमा के मदरसों और मस्जिदों में उपस्थिति भी इस बात का प्रमाण है कि भारत के सीमावर्ती जिलों में साम्प्रदायिक दंगे करवा कर आईएसआई भारतीय सीमा क्षेत्र को असुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहा है।

गृह मंत्रालय को सौंपी गई एनआईडी की रिपोर्ट के मुताबिक टर्की में रहने वाला पाकिस्तानी मूल का मौलाना मोहम्मद इलियास घुमान 26 जुलाई को सुनसरी जिले के देवानगंज में एक मस्जिद में पिछले पांच दिन से रूका हुआ था। उसके साथ में काठमांडू के जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती अबु बकर कासमी भी था। सुनसरी के देवानगंज गांवपालिका के कप्तानगंज में 26 जुलाई को एक शिव मंदिर की खाली जमीन पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मुहर्रम का पर्व मनाने के लिए इस्लामिक झंडे लगाए थे। मुहर्रम खत्म होने के बाद से ही हिन्दू समुदाय के लोग बार-बार इस इस्लामिक झंडे को हटाने के लिए आग्रह कर रहे थे। लगातार एक महीने तक स्थानीय गांवपालिका के जनप्रतिनिधि से लेकर सांसद और पुलिस प्रशासन को कहने के बाद भी मंदिर की खाली जमीन पर लगाए गए इस्लामिक झंडे को नहीं हटाया गया।

श्रावण के महीने में सोमवार को शिव मंदिर में जल चढ़ाने के लिए एक रात पहले यानी 26 जुलाई को जब कांवड़ियों का एक जत्था जल लेने के लिए वहां से निकला, तो पास में ही मदरसे से कांवड़ियों पर हमला कर दिया गया। उस समय वहीं पर मौजूद बिजली विभाग के ट्रांसफार्मर से ही लाइन काट दी गई। एनआईडी की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जिस व्यक्ति ने ट्रांसफार्मर से लाइन काटी थी, उसका नाम नसीम अंसारी है और वह बिजली विभाग में कार्यरत है।

नेपाल के सशस्त्र प्रहरी बल के इंस्पेक्टर राकेश राई के नेतृत्व में मौजूद फोर्स ने कांवड़ियों पर गोली चलाई। वहां पर 21 लोगों को गोली लगने की जानकारी स्थानीय लोगों ने दी। अब तक उनमें से तीन लोगों की मौत हो चुकी है, दो युवकों को अभी भी विराटनगर के एक अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया है। इनमें से एक युवक का तो हाथ काटना पड़ गया है। इस दंगे के बाद विराटनगर से वीरगंज तक के आठ जिलों में हुए प्रदर्शन में सिरहा में पुलिस की गोली से एक और मौत हो गई थी।

नेपाल की खुफिया एजेंसी एनआईडी की रिपोर्ट के मुताबिक आईएसआई के लिए काम करने वाला मौलाना मुहम्मद इलियास घुमान प्रतिबंधित तब्लीगी जमात का एक प्रमुख सदस्य है। इतना ही नहीं घुमान का संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठन हरकत उल मुजाहिदीन, हरकत उल अंसार और हिजबुल मुजाहिद्दीन से भी होने की बात रिपोर्ट में बताई गई है। ये तीनों आतंकी संगठन न सिर्फ भारत में, बल्कि यूएस और यूके में भी प्रतिबंधित है।

गृह मंत्रालय को मिली रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद इलियास और इमाम मुफ्ती अबु बकर ने अपने साथ में कुछ और मौलाना, मौलवियों को लेकर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे नेपाल के विराटनगर, रौतहट, नेपालगंज, कपिलवस्तु जैसे संवेदनशील जिलों का भ्रमण किया है। इन जिलों की मस्जिदों, मदरसे में इनका रुकना और वहां के कट्टरपंथी मुस्लिमों के साथ गोपनीय बैठक करना तथा उन्हीं इलाकों में सुनसरी दंगे के बाद हिंसक प्रदर्शन होने में कोई न कोई संबंध होने की सूक्ष्म तहकीकात करने की सिफारिश खुफिया एजेंसी ने की है।

इतना ही नहीं, जिस दौरान मौलाना मुहम्मद इलियास नेपाल आया और काठमांडू सहित भारतीय सीमा से सटे नेपाली जिलों में घूम रहा था, ठीक उसी समय बांग्लादेश के नौ मौलाना भी उन्हीं जिलों में मौजूद रहे। नेपाल के इमिग्रेशन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक 20 जुलाई को बांग्लादेश के नौ मौलवी ढाका से क्वालालामपुर होते हुए काठमांडू पहुंचे थे। बटिक एयर के उड़ान संख्या OD 182 से काठमांडू पहुंचने वालों में मोहम्मद अक्कास अली, अमीनुल इस्लाम, मो. मुस्ताफिजार रहमान, मोहद गोलाम मोस्तोफा, मो. मोक्लासुर रहमान, मोहम्मद मोनिरुज्जमान लावलु, सैयद शौकत अली, मोहम्मद मोन्सुर रहमान और मोहम्मद अनिसुर रहमान शामिल हैं। इन सभी के 30 दिनों के टूरिस्ट वीजा पर आने का रिकॉर्ड इमिग्रेशन के पास है।

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