पटना : बिहार में गंडक नदी की बाढ़ ने सितंबर के अंतिम सप्ताह में जिस तरह विकराल रूप लिया, उसकी तस्वीर अब अंतरिक्ष से भी सामने आई है। NASA Earth Observatory ने 2 अक्टूबर 2026 को गंडक नदी में आई बाढ़ पर एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें NASA के Terra और Aqua सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों के जरिए 20 सितंबर और 29 सितंबर की स्थिति की तुलना की गई है। तस्वीरों में बाढ़ के दौरान गंडक नदी का फैलाव कई गुना अधिक दिखाई दे रहा है।
20 और 29 सितंबर की तस्वीरों में साफ दिखा अंतर
NASA की रिपोर्ट में MODIS उपकरण से प्राप्त सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। 20 सितंबर की तस्वीर में गंडक नदी अपने अपेक्षाकृत सामान्य स्वरूप में नजर आती है, जबकि 29 सितंबर की तस्वीर में नदी का दायरा काफी चौड़ा दिखाई देता है।
NASA ने इंफ्रारेड और विजिबल लाइट के आंकड़ों को मिलाकर तैयार की गई फॉल्स-कलर तस्वीरों के जरिए जलभराव को अलग से पहचानने में मदद की है। रिपोर्ट के अनुसार तस्वीरों में बाढ़ का पानी नीले रंग में दिखाई देता है, जबकि वनस्पति चमकीले हरे रंग में नजर आती है।
नेपाल में भारी बारिश से बढ़ा गंडक का जलस्तर
NASA के मुताबिक 24 से 27 सितंबर के बीच नेपाल के लुंबिनी और गंडकी प्रांत के पहाड़ी क्षेत्रों में बेहद भारी बारिश हुई। इस बारिश के कारण भूस्खलन हुआ और बड़ी मात्रा में पानी गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में पहुंचा।
नेपाल में गंडक नदी को नारायणी के नाम से जाना जाता है। भारी बारिश के बाद नदी का जलस्तर नेपाल और भारत, दोनों जगहों पर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। कई स्थानों पर पानी तटबंधों के ऊपर से बहा और कुछ जगह तटबंध क्षतिग्रस्त भी हुए।
देवघाट में 11.94 मीटर पहुंचा जलस्तर
NASA की रिपोर्ट में नेपाल के देवघाट का भी उल्लेख है। यहां 27 सितंबर को गंडक नदी का जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंचा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह 1960 के दशक में रिकॉर्ड रखने की शुरुआत के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।
भारत में भी गंडक के किनारे स्थित कई स्थानों पर रिकॉर्ड जलस्तर दर्ज किए गए। बगहा, डुमरियाघाट, रेवा घाट और लालगंज जैसे स्थानों का NASA की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।
बिहार के कई जिलों में दिखा बाढ़ का असर
गंडक के बढ़े जलस्तर का असर पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में देखने को मिला। 28 सितंबर को वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5,43,500 क्यूसेक जलस्राव दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। अत्यधिक जलश्राव के कारण तटबंधों पर दबाव बढ़ा और कई स्थानों पर सीपेज, पाइपिंग तथा ओवरटॉपिंग की स्थिति बनी।
बिहार सरकार भी लगातार कर रही निगरानी
गंडक में बढ़े जलस्तर के बीच बिहार सरकार ने प्रभावित इलाकों की स्थिति पर निगरानी बढ़ाई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गोपालगंज और मोतिहारी क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया था। अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में राहत शिविर और कम्युनिटी किचन समेत जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी ने भी NASA की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस बार गंडक में आई बाढ़ सामान्य मौसमी परिस्थितियों से अलग थी। उनके अनुसार नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हुई असामान्य रूप से भारी बारिश का सीधा असर बिहार में देखने को मिला।
NASA की तस्वीरों से समझिए बाढ़ का असली फैलाव
बाढ़ के दौरान जमीन पर किसी एक स्थान की तस्वीर से पूरे क्षेत्र में पानी के फैलाव का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। ऐसे में सैटेलाइट इमेजरी बड़े भू-भाग को एक साथ देखने और अलग-अलग तारीखों की तस्वीरों की तुलना करने में मदद करती है।
गंडक की 20 और 29 सितंबर की तस्वीरों में दिखाई दे रहा अंतर इस बात को स्पष्ट करता है कि कुछ ही दिनों में नदी और उससे जुड़े बाढ़ क्षेत्र का विस्तार किस तरह बढ़ा।
नेपाल से बिहार तक गंडक का सीधा कनेक्शन
गंडक नदी का जलग्रहण क्षेत्र नेपाल के पहाड़ी इलाकों तक फैला है। इसलिए नेपाल में होने वाली अत्यधिक बारिश और उससे निकलने वाला पानी बिहार में नदी के जलस्तर को प्रभावित कर सकता है।
इस बार भी सितंबर के अंतिम सप्ताह में नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद गंडक में तेज जलप्रवाह देखने को मिला। NASA की सैटेलाइट तस्वीरों ने इस पूरी स्थिति को अंतरिक्ष से रिकॉर्ड किया है। ऐसे में ये तस्वीरें सिर्फ बाढ़ की भयावहता दिखाने वाली तस्वीरें नहीं हैं, बल्कि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र और बिहार के मैदानी इलाकों के बीच नदी तंत्र के संबंध को समझने का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक माध्यम भी हैं।







