सहरसा : सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार के मामले में बिहार स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार आजाद और चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रोशन लाल को तत्काल प्रभाव से स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय में योगदान करने का निर्देश दिया है।
यह कार्रवाई जिलाधिकारी सहरसा की रिपोर्ट और मामले में हुई जांच के आधार पर की गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 18 सितंबर 2026 को जारी आदेश में दोनों चिकित्सकों को सहरसा सदर अस्पताल से हटाकर विभागीय मुख्यालय में योगदान करने का निर्देश दिया गया है।
बच्चों की तबीयत बिगड़ने की रिपोर्टिंग के दौरान हुआ था विवाद
मामला 12 सितंबर का है। मध्याह्न भोजन खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटना की रिपोर्टिंग के लिए मीडिया कर्मी सहरसा सदर अस्पताल पहुंचे थे। इसी दौरान पत्रकार और अस्पताल के कुछ चिकित्सकों एवं कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ।
पत्रकार की ओर से मारपीट, अभद्र व्यवहार और अन्य आरोप लगाए गए थे। वहीं अस्पताल प्रशासन की ओर से भी पत्रकारों पर इलाज में व्यवधान और आपातकालीन वार्ड में हंगामा करने के आरोप लगाए गए थे। दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को आवेदन दिए जाने की बात सामने आई थी।
जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लिया फैसला
घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद सहरसा के जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने मामले को संज्ञान में लेते हुए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी। समिति को घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था।
इसके बाद जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने दोनों डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की है। विभागीय आदेश में मीडिया कर्मी के साथ कथित अभद्र व्यवहार और मारपीट के अलावा घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज मिटाने के आरोप का भी उल्लेख किया गया है।
अस्पताल प्रबंधक पर भी कार्रवाई
इस मामले में अस्पताल की प्रबंधक सिम्पी कुमारी भी कार्रवाई की जद में आई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। साथ ही उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यकारी निदेशक को निर्देश दिया गया है।
अब स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय में देना होगा योगदान
स्वास्थ्य विभाग के आदेश के बाद डॉ. सुशील कुमार आजाद और डॉ. रोशन लाल को सहरसा सदर अस्पताल के बजाय स्वास्थ्य विभाग, बिहार के मुख्यालय में योगदान करना होगा।
इस कार्रवाई के बाद सहरसा सदर अस्पताल में हुए विवाद का मामला एक बार फिर चर्चा में है। अब आगे की विभागीय कार्रवाई और मामले की जांच की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।







