Homeराज्यबिहार के गांवों में टैक्स को लेकर बड़ा अपडेट, गरीब परिवारों को...

बिहार के गांवों में टैक्स को लेकर बड़ा अपडेट, गरीब परिवारों को नहीं देना होगा पैसा!

पटना : बिहार के गांवों में टैक्स व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि गरीब लोगों पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया जाएगा। वहीं, पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए गांवों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों से टैक्स वसूली की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री सोमवार को पटना में आयोजित ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पंचायतों के पास अपने विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन होना जरूरी है।

किन गतिविधियों से लिया जा सकता है टैक्स?

मुख्यमंत्री के अनुसार गांवों में संचालित ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल, मोबाइल टावर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां पंचायतों के लिए राजस्व का स्रोत बन सकती हैं। इन गतिविधियों से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में किया जा सकता है।

इसमें कचरा प्रबंधन, पेयजल और पंचायत क्षेत्र की अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।

गरीब परिवारों को टैक्स से राहत

ग्रामीण टैक्स व्यवस्था को लेकर पहले से चल रही चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गरीबों पर कर का अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।

बिहार ग्राम पंचायत (कर, दर एवं शुल्क) नियमावली-2026 के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग श्रेणियों के लिए कर एवं शुल्क का प्रावधान किया गया है। पहले सामने आई जानकारी के अनुसार कच्चे मकानों को होल्डिंग टैक्स से बाहर रखने तथा अलग-अलग प्रकार के मकानों और व्यावसायिक परिसरों के लिए अलग दरों का प्रावधान किया गया है।

पंचायतों को मिलेगा बड़ा विकास फंड

मुख्यमंत्री ने पंचायतों के विकास के लिए उपलब्ध होने वाली राशि का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार 16वें वित्त आयोग के तहत अगले पांच वर्षों में बिहार की पंचायतों को करीब 52 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे।

इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से करीब 47 हजार करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध होने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार अगले पांच वर्षों में पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से विकास कार्यों पर कुल मिलाकर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा सकते हैं।

टैक्स से मिलने वाले पैसे का क्या होगा?

सरकार का तर्क है कि पंचायतों की अपनी आय बढ़ने से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे। खासकर पेयजल, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में पंचायतों को मदद मिल सकती है।

पंचायतों को जवाबदेही के साथ काम करने की सलाह

मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से अपनी पंचायत के विकास का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखने की बात भी कही। उन्होंने मुखिया, प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद के स्तर पर विकास योजनाओं और उपलब्ध संसाधनों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।

उन्होंने पंचायतों में स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और पुराने सामुदायिक भवनों जैसे महत्वपूर्ण स्थानों के जीर्णोद्धार सहित कम से कम 10 प्रमुख योजनाओं पर काम करने की अपील की।

साफ शब्दों में समझें

गरीब ग्रामीण परिवारों पर नया टैक्स लगाने की बात नहीं है। सरकार का जोर पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए ईंट-भट्ठे, निजी स्कूल, मोबाइल टावर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से राजस्व जुटाने पर है। इसका उद्देश्य पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत करना और स्थानीय सुविधाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना बताया गया है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments