डेस्क: जमुई में नाबालिग से कथित बदसलूकी के मामले में पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला एसडीपीओ दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है। पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक तीन नाबालिगों को निरुद्ध किया गया है, जबकि दो अन्य युवकों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है।
पुलिस मुख्यालय ने लिया संज्ञान
जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ कथित बदसलूकी से जुड़े वीडियो के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले का संज्ञान लिया। एडीजी विधि-व्यवस्था केएस अनुपम के अनुसार, घटना की जांच के लिए विशेष टीम बनाई गई है, जो मामले से जुड़े सभी पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी।
मामले में पोक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महिला SDPO के नेतृत्व में SIT
मामले की जांच के लिए गठित SIT की कमान महिला एसडीपीओ दीप्ति मोनाली को सौंपी गई है। टीम का मुख्य उद्देश्य घटना से जुड़े तथ्यों की जांच करना, आरोपितों की भूमिका स्पष्ट करना और उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाना है।
पुलिस के मुताबिक, तीन नाबालिगों को अब तक निरुद्ध किया गया है। वहीं दो अन्य युवकों की पहचान हुई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर कार्रवाई कर रही है।
स्पीडी ट्रायल की तैयारी
पुलिस मुख्यालय ने मामले में स्पीडी ट्रायल की तैयारी की बात कही है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। पुलिस का फोकस मामले की जांच को तेजी से पूरा करने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करने पर है।
वायरल वीडियो को लेकर भी कार्रवाई
घटना से जुड़ा आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस ने वीडियो को हटाने की प्रक्रिया शुरू की है। पुलिस के अनुसार, फेसबुक और एक्स समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वीडियो को टेकडाउन कराया गया है।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि नाबालिग की पहचान उजागर करने वाले या आपत्तिजनक वीडियो को प्रसारित करने वाले लोगों और वेबसाइटों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नाबालिग की पहचान सार्वजनिक करने से बचने की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग से जुड़े किसी भी वीडियो, फोटो या ऐसी सामग्री को सोशल मीडिया पर साझा न करें, जिससे पीड़ित की पहचान उजागर हो सकती है। मामले में पुलिस पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखने पर भी जोर दे रही है।
जांच एजेंसियां अब घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।







