पटना : महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर बिहार सरकार ने राज्य की विभिन्न जेलों में बंद 44 कैदियों को रिहा करने का फैसला लिया है। इन कैदियों को 2 अक्टूबर 2026 को विशेष सजा माफी के तहत रिहा किया जाएगा। रिहाई पाने वालों में बड़ी संख्या बुजुर्ग और लंबे समय से सजा काट रहे कैदियों की है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक, रिहा होने वाले 44 कैदियों में दो की उम्र 90 वर्ष से अधिक, आठ की उम्र 80 वर्ष से अधिक और 20 कैदी 70 से 80 वर्ष की आयु के बीच हैं। इसके अलावा गंभीर बीमारी से पीड़ित कैदियों को भी मानवीय आधार पर रिहाई दी जा रही है।
93 वर्षीय रामवृक्ष कोइरी भी होंगे रिहा
रिहा होने वाले कैदियों में 93 वर्षीय रामवृक्ष कोइरी का नाम भी शामिल है। इसके अलावा हरिवंश राम (84) और रामाशीष यादव (82) समेत अन्य बुजुर्ग कैदी भी रिहा किए जाएंगे। गंभीर बीमारी से जूझ रहे सत्यनारायण सिंह और पंकज गुप्ता को भी रिहाई दी जा रही है।
पूर्णिया जेल में करीब 20 वर्षों से सजा काट रही एक महिला कैदी भी रिहा होने वालों में शामिल है। सरकार के अनुसार, इस फैसले के पीछे मानवीय आधार, सामाजिक पुनर्वास और जनकल्याण को ध्यान में रखा गया है।
आठ साल बाद गांधी जयंती पर फिर रिहाई
गांधी जयंती के अवसर पर कैदियों की रिहाई का यह फैसला करीब आठ साल बाद आया है। इससे पहले 2018 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर बिहार की विभिन्न जेलों से 43 कैदियों को रिहा किया गया था।
कैदियों की रिहाई की सिफारिश राज्य कैदी परिहार समिति की ओर से की गई थी। इसके बाद सरकार ने पात्र कैदियों के लिए विशेष सजा माफी को मंजूरी दी।
1820 पीड़ित परिवारों को 3.86 करोड़ रुपये की सहायता
गांधी जयंती के मौके पर सरकार की ओर से अपराध से प्रभावित परिवारों को भी आर्थिक सहायता दी जाएगी। करीब 1,820 लाभार्थी परिवारों के बीच 3.86 करोड़ रुपये वितरित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जेलों में काम करने वाले कैदियों के पारिश्रमिक का एक हिस्सा अपराध पीड़ित कल्याण के लिए जमा किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, इसी राशि से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।







