पटना : बिहार की शिक्षा व्यवस्था में छात्रों की जरूरतों और बदलते रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखते हुए बदलाव की तैयारी शुरू कर दी गई है। अब स्कूलों में पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इसके लिए मास्टर प्लान तैयार कर लिया है।
शिक्षा विभाग की योजना के तहत राज्य के प्रत्येक जिले में एक स्कूल को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इन स्कूलों में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था लागू करने के साथ विद्यार्थियों को करियर ओरिएंटेड पाठ्यक्रम, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जुड़े विकल्प उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
शिक्षा विभाग के निर्देश पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति हर जिले में चयनित स्कूल को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करेगी। इसमें स्कूल के चयन से लेकर आवश्यक संसाधन, आधुनिक पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और रोजगारपरक शिक्षा की व्यवस्था शामिल होगी।
पुराने और कम उपयोगी ट्रेड व सिलेबस की भी समीक्षा की जाएगी। जिन ट्रेड की वर्तमान समय में उपयोगिता कम हो गई है, उन्हें हटाकर उद्योगों की मांग और रोजगार की संभावनाओं से जुड़े नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। प्रस्तावित आधुनिक पाठ्यक्रमों में एनिमेशन डिजाइनिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मोबाइल रिपेयरिंग, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को व्यावसायिक शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए बेहतर करियर विकल्प बनाने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया है। साथ ही आईटीआई और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग के प्रति छात्रों और अभिभावकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है।
बैठक में यह भी कहा गया कि नए पाठ्यक्रम तैयार करते समय उद्योगों की जरूरत और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखा जाए। इसके लिए निफ्ट सहित अन्य तकनीकी शिक्षण संस्थानों से संपर्क किया जा सकता है। योजना लागू होने के बाद विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ तकनीकी और व्यावहारिक कौशल हासिल करने के अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है।







