पटना: बिहार में केंद्र सरकार की ओर से संचालित पशुपालन एवं डेयरी विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए भारत सरकार का चार सदस्यीय राष्ट्रीय स्तरीय मॉनिटरिंग दल राज्य के दौरे पर पहुंचा है। यह दल पटना समेत छह जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रगति और पशुपालकों को मिल रहे लाभों का स्थलीय निरीक्षण करेगा। निरीक्षण के बाद 15 अक्टूबर 2026 को रिपोर्ट और सुधार संबंधी सुझाव प्रस्तुत किए जाएंगे।
शुक्रवार, 9 अक्टूबर को पटना स्थित COMFED सभागार में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव और COMFED के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र प्रायोजित योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले उपलब्धियों और योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
छह जिलों में होगा स्थल निरीक्षण
राष्ट्रीय स्तरीय मॉनिटरिंग दल में भारत सरकार के मुकेश शर्मा, डॉ. कर्नल अजय कुमार गहलोत, डॉ. अनिल कुमार और ए.एल. निराला शामिल हैं। दल के सदस्य पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज में विभिन्न योजनाओं का निरीक्षण करेंगे। इसके तहत संबंधित संस्थानों, पशु चिकित्सा सेवाओं, प्रशिक्षण केंद्रों, परियोजना स्थलों और लाभार्थियों से जानकारी जुटाई जाएगी।
टीकाकरण और मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं पर नजर
निरीक्षण के दौरान पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत खुरपका-मुंहपका रोग (FMD), लम्पी स्किन डिजीज (LSD) और अन्य पशु रोगों के विरुद्ध चल रहे टीकाकरण अभियान की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों, पशु औषधि केंद्रों, दवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण पशुपालकों तक चिकित्सा सेवाओं की पहुंच का आकलन होगा।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार में खुरपका-मुंहपका रोग के विरुद्ध 420.90 लाख टीकाकरण किए गए, जो निर्धारित लक्ष्य का 96.27 प्रतिशत है। वहीं, गलघोंटू और लंगड़ी बुखार के विरुद्ध टीकाकरण में 99.99 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति की जानकारी दी गई।
नस्ल सुधार और डेयरी विकास योजनाओं की भी समीक्षा
दल राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD), राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) और पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (AHIDF) जैसी योजनाओं का भी मूल्यांकन करेगा। कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक और उन्नत नस्ल के पशुओं के विकास से जुड़ी गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
समीक्षा बैठक में साझा जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान बिहार में विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से लगभग 49.08 लाख कृत्रिम गर्भाधान किए गए।
15 अक्टूबर को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
निरीक्षण का उद्देश्य योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करने के साथ-साथ क्रियान्वयन में आने वाली कमियों की पहचान करना और सुधार के उपाय सुझाना है। 15 अक्टूबर को मॉनिटरिंग दल अपने निष्कर्ष और अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगा। इससे पशुपालन सेवाओं को बेहतर बनाने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पशुपालकों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। बैठक में पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं के नोडल पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।







