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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस : मुख्यमंत्री ने बुनकरों को बताया असम की सांस्कृतिक विरासत का आधार

गुवाहाटी, 07 अगस्त  राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने राज्य के हथकरघा बुनकरों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में हथकरघा उद्योग आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर साझा अपने संदेश में कहा कि बुनकरों के कल्याण और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वाकांक्षी पहलें शुरू की हैं। इन प्रयासों से हथकरघा क्षेत्र को मजबूती मिली है और इससे जुड़े लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो रहा है।

उन्होंने असम के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि अहोम शासनकाल में भी कुशल शिल्पियों की समृद्ध परंपरा रही है, जो रातोंरात सूत कातकर उत्कृष्ट वस्त्र तैयार करने के लिए प्रसिद्ध थे।

डॉ. सरमा ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र का विकास महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर उन्होंने असम की समृद्ध हथकरघा परंपरा को जीवित रखने वाले सभी बुनकरों की सृजनशीलता और समर्पण पर गर्व व्यक्त किया।

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