पटना। आज देशभर में दीपावली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। बिहार में भी दीपावली को लेकर उत्साह का माहौल है। घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। शाम होते ही दीपों की रोशनी से पूरा वातावरण जगमगा उठेगा। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है।
लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, पटना में दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 28 मिनट से 7 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इस दौरान वृषभ लग्न और प्रदोष काल में मां लक्ष्मी एवं भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना गया है।
- दीपावली: 8 नवंबर 2026, रविवार
- लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 5:28 से 7:25 बजे तक
- प्रदोष काल: शाम 5:04 से 7:40 बजे तक
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे
- निशीथ काल: रात 11:07 से 11:59 बजे तक
कैसे करें मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा?
दीपावली के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर और पूजा स्थल की सफाई करें। शाम को पूजा की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान और पूजन करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को फूल, अक्षत, रोली, चंदन, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें। मां लक्ष्मी की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। पूजा के बाद घर के मुख्य द्वार, आंगन और मंदिर में दीपक जलाएं।
दीपावली पर दीप जलाने का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली का पर्व भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है। इस अवसर पर अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपावली को अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
बिहार में बाजारों से लेकर घरों तक उत्सव का माहौल
पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, सहरसा और पूर्णिया सहित राज्य के विभिन्न जिलों में दीपावली को लेकर बाजारों में रौनक है। लोग मिठाइयां, मिट्टी के दीये, फूल-माला, पूजा सामग्री और सजावटी सामान की खरीदारी कर रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में त्योहार को लेकर खास उत्साह है।
सुरक्षा और पर्यावरण का रखें ध्यान
दीपावली पर पटाखे जलाते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें। बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों का विशेष ध्यान रखें। मिट्टी के दीये जलाकर पर्यावरण अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने की अपील की गई है।







