पटना : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। मधुबनी में पदस्थापित पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता रितेश चन्द्र सिन्हा को 5 लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया है। निगरानी की टीम ने उन्हें पटना के आशियाना स्थित उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद जब फ्लैट की तलाशी ली गई तो वहां से 6 लाख 11 हजार 900 रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण और संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 8 नवंबर 2026 को मुख्यालय की टीम ने यह कार्रवाई की। आरोपी रितेश चन्द्र सिन्हा मधुबनी जिले के पथ प्रमंडल में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात थे।
इस पूरे मामले की शुरुआत रोहतास जिले के डेहरी-ऑन-सोन निवासी अरुण कुमार सिंह की शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता ने निगरानी ब्यूरो को बताया था कि मधुबनी में सड़क निर्माण के दो प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें एक सड़क निर्माण परियोजना की लागत करीब 5.78 करोड़ रुपये और दूसरी परियोजना की लागत करीब 13.48 करोड़ रुपये है।
शिकायत के अनुसार, दोनों परियोजनाओं के बकाया भुगतान के बदले कार्यपालक अभियंता ने कुल बकाया राशि के 3 प्रतिशत के हिसाब से 19 लाख 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। तत्काल एडवांस के रूप में 5 लाख रुपये देने को कहा जा रहा था।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने पहले आरोपों का सत्यापन कराया। सत्यापन में रिश्वत मांगने की बात सामने आने के बाद निगरानी थाना कांड संख्या 133/26 दर्ज किया गया और पुलिस उपाधीक्षक श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में धावादल का गठन किया गया।
8 नवंबर को जब निगरानी की टीम ने कार्रवाई की तो आरोपी ने अपने हाथों से 5 लाख रुपये रिश्वत की रकम ली। टीम को देखते ही उसने रुपये अपने फ्लैट की खिड़की से बाहर छोटे मैदान में फेंक दिए। हालांकि, निगरानी टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरी रकम बरामद कर ली और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद पटना के रामनगरी, आशियाना स्थित शिव-पार्वती गृह अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर C-303 की तलाशी ली गई। इस दौरान कई महत्वपूर्ण चीजें बरामद हुईं।
6 लाख 11 हजार 900 रुपये नकद।
सोने और चांदी के आभूषण।
शेयर और LIC में निवेश के दस्तावेज।
सात बैंक खातों से संबंधित जानकारी।
जमीन और फ्लैट के कागजात।
लॉकर की चाबी और उससे संबंधित दस्तावेज।
बरामद आभूषणों का मूल्यांकन अभी किया जा रहा है। निगरानी ब्यूरो की टीम आरोपी की संपत्ति और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
2026 में निगरानी की 133वीं FIR
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह 133वीं प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई है। एक अन्य जिले से स्थानांतरित मामले को मिलाकर ब्यूरो कुल 134 मामलों का अनुसंधान कर रहा है।
वहीं, यह वर्ष 2026 का 121वां ट्रैप कांड है। इन मामलों में अब तक 120 आरोपियों को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया जा चुका है। रिश्वत के रूप में कुल 45 लाख 60 हजार 400 रुपये बरामद किए गए हैं। फिलहाल, गिरफ्तार कार्यपालक अभियंता से पूछताछ की जा रही है। इसके बाद उन्हें पटना स्थित निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
