भागलपुर, 22 अगस्त :जिले के गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर है। भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड में चीनी मिल स्थापित करने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया गया है।
जिला प्रशासन ने चीनी मिल के निर्माण के लिए 100 एकड़ भूमि को चिन्हित कर लिया है और इसकी विस्तृत रिपोर्ट राज्य के ईख विकास विभाग को भेज दी है। भागलपुर की डीएम अलंकृता पांडेय ने इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि लंबे समय से चल रही जमीन की तलाश पूरी हो चुकी है और 100 एकड़ का भूखंड फाइनल कर रिपोर्ट विभाग को सौंप दी गई है। अब राज्य मुख्यालय और ईख विकास विभाग की ओर से हरी झंडी मिलते ही मिल की स्थापना और निर्माण की जमीनी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि भागलपुर में एक भी चीनी मिल नहीं है। जिला स्तर पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान समय में भागलपुर जिले के भीतर एक भी चीनी मिल संचालित नहीं है। यही वजह है कि राज्य सरकार इस क्षेत्र में नई औद्योगिक इकाई स्थापित करने की संभावनाओं पर लगातार काम कर रही थी। पीरपैंती में मिल खोलने की यह कवायद पिछले कई महीनों से मुख्यालय के निर्देशों के बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा की जा रही थी।
पीरपैंती और उसके सीमावर्ती इलाकों के गन्ना किसानों के लिए यह परियोजना किसी वरदान से कम नहीं है। वर्तमान में स्थानीय स्तर पर मिल न होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूसरे जिलों या सुदूर क्षेत्रों के बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है। गन्ने को दूसरे जिलों में भेजने पर किसानों की जेब पर भारी परिवहन (ढुलाई) खर्च का बोझ पड़ता है। स्थानीय स्तर पर मिल होने से यह खर्च खत्म हो जाएगा। सही समय पर गन्ने की पिराई न होने से फसल सूखने का डर रहता था, जिससे अब राहत मिलेगी। ईख विकास विभाग का अनुमान है कि पीरपैंती में मिल की स्थापना की खबर से किसानों का रुझान इस नकदी फसल की तरफ तेजी से बढ़ेगा। विभाग आने वाले समय में अधिक से अधिक किसानों को गन्ने की खेती से जोड़ने की विशेष योजना तैयार कर रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में क्षेत्र में गन्ने की खेती का रकबा काफी बढ़ जाएगा। इस चीनी मिल का प्रभाव केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे भागलपुर जिले के औद्योगिक विकास को गति देगा। मिल के निर्माण कार्य से लेकर उसके संचालन, पिराई सत्र के प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में हजारों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। फिलहाल, जिले के किसानों और व्यवसायियों की नजरें ईख विकास विभाग से मिलने वाली अंतिम मंजूरी पर टिकी हैं।
