पटना : बिहार में प्रस्तावित 12 नई सेटेलाइट टाउनशिप के लिए जमीन जुटाने को लेकर सरकार ने नया फॉर्मूला तैयार किया है। किसानों और जमीन मालिकों की आपत्तियों के बीच सरकार अब सीधे जमीन लेने के बजाय पहले संवाद और सहमति का रास्ता अपनाएगी। इसके लिए किसानों के सामने चार विकल्प रखे जाएंगे।
नगर विकास एवं आवास विभाग के अधिकारी गांवों में जाकर किसानों को इन विकल्पों की जानकारी देंगे। जमीन लेने की प्रक्रिया किसानों की सहमति और परिस्थिति के आधार पर तय करने की तैयारी है।
12 टाउनशिप की सीमाएं तय
सरकार ने प्रस्तावित सभी 12 सेटेलाइट टाउनशिप की सीमाएं निर्धारित कर दी हैं। वहीं, पाटलिपुत्र टाउनशिप की विकास योजना का प्रारूप भी प्रकाशित किया जा चुका है। इसे 30 सेक्टरों में विकसित करने की योजना है।
जमीन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद जमीन उपलब्ध कराने और विकास कार्य शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।
पहला विकल्प: लैंड पुलिंग
सरकार किसानों के सामने सबसे पहले लैंड पुलिंग मॉडल रखेगी। इसके तहत किसी सेक्टर के विकास के लिए किसानों की जमीन सामूहिक रूप से ली जाएगी। सड़क, नाला, पार्क, सीवरेज और अन्य सुविधाओं का विकास करने के बाद विकसित जमीन का 55 प्रतिशत हिस्सा जमीन मालिकों को वापस देने का प्रावधान होगा।
यह जरूरी नहीं होगा कि किसानों को उनकी मूल जमीन वाली जगह पर ही प्लॉट मिले। विकसित सेक्टर में दूसरी उपयुक्त जगह पर जमीन देने का विकल्प भी हो सकता है।
दूसरा विकल्प: आपसी समझौता
अगर किसान लैंड पुलिंग के लिए तैयार नहीं होते हैं तो दूसरा विकल्प निगोशिएटेड सेटलमेंट यानी आपसी समझौते का होगा। इसमें सरकार जमीन मालिकों से बातचीत कर सहमति के आधार पर जमीन लेने की कोशिश करेगी।
इस मॉडल में सामान्य मुआवजे के अलावा अतिरिक्त लाभ देने पर भी विचार किया जा सकता है। इनमें एफएआर, टीडीआर और विकास शुल्क में छूट जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।
तीसरा विकल्प: जमीन खरीद या अधिग्रहण
टाउनशिप में सड़क, स्कूल, कॉलेज, पार्क और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जरूरी जमीन के मामले में सरकार पहले आपसी सहमति से खरीद की कोशिश करेगी। यदि जमीन मालिक सहमत नहीं होते हैं तो नियमों के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
चौथा विकल्प: हाइब्रिड मॉडल
यदि किसी सेक्टर में सभी किसान एक ही व्यवस्था पर सहमत नहीं होते हैं तो सरकार हाइब्रिड मॉडल अपना सकती है। इसमें एक ही सेक्टर में अलग-अलग किसानों के लिए लैंड पुलिंग, आपसी समझौता, जमीन खरीद या अधिग्रहण जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
किसानों की सहमति पर टिकी टाउनशिप की राह
सरकार 12 सेटेलाइट टाउनशिप को बिहार के भविष्य के शहरी विकास की बड़ी योजना के तौर पर देख रही है। हालांकि, इन परियोजनाओं के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती है।
किसानों के विरोध के बीच सरकार ने अब पहले संवाद और विकल्पों के जरिए सहमति बनाने की रणनीति अपनाई है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि किसान चारों विकल्पों में से किस मॉडल को स्वीकार करते हैं और इससे बिहार की प्रस्तावित टाउनशिप परियोजनाओं को कितनी तेजी मिलती है।







