पटना: भारत-नेपाल सीमा से सटे बिहार के जिलों में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की आपराधिक गतिविधियों को लेकर सरकार और सुरक्षा एजेंसियां सख्त रुख अपनाने की तैयारी में हैं। उच्चस्तरीय बैठक में ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान कर, जो अपराध में संलिप्त पाए जाते हैं, उनके खिलाफ ‘पुश बैक’ नीति के तहत कार्रवाई करने पर चर्चा हुई।
बैठक में ड्रग तस्करी, नकली नोट, फर्जी दस्तावेज, साइबर अपराध और सीमा से जुड़ी अन्य गतिविधियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
अपराध में शामिल विदेशी नागरिकों की होगी पहचान
बिहार पुलिस के अनुसार, सीमा से लगे कुछ जिलों में ऐसे विदेशी नागरिकों की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के मामले सामने आए हैं, जो कथित तौर पर रिहा होने के बाद दोबारा अपराध में शामिल हो रहे हैं।
ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए उनकी पहचान और दस्तावेजों की जांच के साथ आगे की कार्रवाई करने की बात कही गई है।
‘पुश बैक’ नीति के तहत होगी कार्रवाई
उच्चस्तरीय बैठक में भारत सरकार की ‘पुश बैक’ नीति के तहत कार्रवाई की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति की पहचान और दस्तावेजों की जांच के बाद निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत उसे देश से बाहर भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, किसी भी व्यक्ति की नागरिकता और कानूनी स्थिति की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर ही की जाएगी।
सीतामढ़ी के मामले पर DGP ने मांगी रिपोर्ट
बैठक में सीतामढ़ी जिले से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, एक कथित अवैध घुसपैठिया रिहाई के बाद दोबारा फर्जी दस्तावेज तैयार करने की गतिविधि में शामिल पाया गया।
इस मामले में DGP विनय कुमार ने सीतामढ़ी के SP से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।
ड्रग तस्करों पर भी कड़ी नजर
बैठक में ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। पुलिस के अनुसार, जमानत पर बाहर आने के बाद दोबारा नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल होने वाले आरोपियों के खिलाफ PIT-NDPS Act के तहत कार्रवाई की जा रही है।
इस कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में बार-बार ड्रग तस्करी में शामिल आरोपियों या ड्रग नेटवर्क से जुड़े लोगों को निवारक हिरासत में रखने का प्रावधान है।
ई-कॉमर्स के जरिए विस्फोटक सामग्री मंगाने का मामला
पूर्वी चंपारण में ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से विस्फोटक सामग्री मंगाए जाने का मामला भी बैठक में सामने आया।
इसके बाद बिहार पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे मामलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस को निर्देश दिया गया कि गंभीर मामलों की जानकारी जांच पूरी होने से पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुंचाई जाए।
फर्जी आधार कार्ड से साइबर ठगी पर कार्रवाई
सीमावर्ती जिलों में फर्जी आधार कार्ड के जरिए साइबर अपराध करने वाले लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस को ऐसे मामलों में गहराई से जांच कर समयबद्ध कार्रवाई और ट्रायल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जाली नोटों के मामलों की जांच में तेजी
बैठक में जाली नोट से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। संबंधित मामलों में जांच तेज करने, आरोपियों की गिरफ्तारी और इसकी जानकारी आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को देने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा सीमा से जुड़े क्षेत्रों में लगने वाले पशु हाटों पर भी विशेष निगरानी रखने की बात कही गई है।
सीमा सुरक्षा को लेकर बढ़ाई जा रही निगरानी
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े मामलों को लेकर हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में बिहार पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
सरकार का फोकस अवैध गतिविधियों, ड्रग तस्करी, फर्जी दस्तावेज, जाली नोट और साइबर अपराध जैसे मामलों पर कार्रवाई तेज करने पर है।
