Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस बार कई खास संयोग लेकर आ रहा है। सावन शुक्ल पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस पर्व पर इस बार भद्रा की बाधा नहीं रहेगी। ऐसे में बहनें अपनी सुविधा के अनुसार पूरे दिन भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।
रक्षाबंधन को लेकर बाजारों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। राखी, मिठाई और पूजा सामग्री की दुकानों पर खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ नजर आ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती है। वहीं भाई बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है।
भद्रा नहीं, पूरे दिन राखी बांधने का अवसर
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सावन शुक्ल पूर्णिमा की तिथि शुक्रवार सुबह 9:27 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा उदया तिथि में होने के कारण रक्षाबंधन का पर्व पूरे दिन मनाया जाएगा। इस दिन शतभिषा नक्षत्र का संयोग भी रहेगा।
भद्रा का साया नहीं होने के कारण इस बार बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा समाप्त होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हालांकि शुभ मुहूर्त में राखी बांधना विशेष फलदायी माना जाता है।
राखी बांधने के शुभ मुहूर्त
रक्षाबंधन के दिन कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। इनमें सुबह का चर-लाभ-अमृत मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त प्रमुख हैं।
पूर्णिमा तिथि: सुबह 9:27 बजे तक
चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: सुबह 5:29 बजे से 10:15 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:25 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक
विशिष्ट शुभ मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 1:26 बजे तक
हालांकि पूरे दिन पूर्णिमा का मान होने के कारण बहनें अपनी सुविधा के अनुसार भी भाई को राखी बांध सकती हैं।
चंद्रग्रहण का भी संयोग, लेकिन भारत में नहीं दिखेगा
रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण का संयोग भी बन रहा है। बताया गया है कि सुबह 8:04 बजे से 11:22 बजे तक खंडग्रास चंद्रग्रहण रहेगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब ग्रहण किसी स्थान से दिखाई नहीं देता तो वहां उसका सूतक काल मान्य नहीं होता। इसलिए भारत में इस चंद्रग्रहण का रक्षाबंधन के धार्मिक आयोजन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और यहां सूतक भी मान्य नहीं होगा।
ऐसे करें राखी बांधने की पूजा
रक्षाबंधन के दिन बहनें सबसे पहले पूजा की थाली तैयार करें। इसमें रोली या चंदन, अक्षत, फूल, मिठाई और घी का दीपक रखा जा सकता है। भाई को तिलक लगाने के बाद उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें और सुख-समृद्धि व दीर्घायु की कामना करें।
इसके बाद भाई बहन को उपहार देकर हमेशा उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेता है।
भगवान को भी अर्पित की जाएगी राखी
रक्षाबंधन पर कई घरों और मंदिरों में देवी-देवताओं को भी रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपने इष्टदेव और कुलदेवता के साथ भगवान शिव, गणेश, बजरंगबली, श्रीराम और लड्डू गोपाल को भी राखी अर्पित करेंगे। इसके बाद भगवान को मिठाई और पकवान का भोग लगाकर आरती की जाएगी।
राशि के अनुसार राखी का रंग
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भाई की राशि के आधार पर राखी का रंग चुनना भी शुभ माना जाता है।
मेष: लाल, केसरिया या पीला
वृषभ: नीला या चांदी
मिथुन: हरा
कर्क: सफेद या मोती वाली
सिंह: गुलाबी, लाल या केसरिया
कन्या: सफेद या हरा
तुला: फिरोजी या जमुनी
वृश्चिक: लाल
धनु: पीला
मकर: गहरा लाल
कुंभ: रुद्राक्ष वाली
मीन: पीली या सफेद
कुल मिलाकर इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा की बाधा नहीं रहेगी और भारत में चंद्रग्रहण का सूतक भी मान्य नहीं होगा। ऐसे में भाई-बहन बिना किसी धार्मिक बाधा के पूरे उत्साह और शुभ भावना के साथ रक्षाबंधन का पर्व मना सकेंगे।
