पटना: बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। इन सीटों में चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। मौजूदा विधान पार्षदों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग की तैयारियों के बीच आने वाले दिनों में बिहार की सियासत में एक बार फिर चुनावी सरगर्मी बढ़ने की उम्मीद है।
पांच निर्वाचन क्षेत्रों में होगा चुनाव
इन 8 सीटों के लिए कुल पांच निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव कराया जाएगा।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटें पटना, दरभंगा, सारण और तिरहुत में हैं। वहीं स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटें पटना, दरभंगा, कोसी और तिरहुत में हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पात्र शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले स्नातक मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं।
8 सीटों पर कौन है मौजूदा MLC?
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
पटना: प्रो. नवल किशोर यादव – भाजपा
दरभंगा: डॉ. मदनमोहन झा – कांग्रेस
सारण: आफाक अहमद – निर्दलीय
तिरहुत: संजय कुमार सिंह – भाकपा
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
पटना: नीरज कुमार – जदयू
दरभंगा: सर्वेश कुमार – निर्दलीय
कोसी: एनके यादव – भाजपा
तिरहुत: बंशीधर व्रजवासी – निर्दलीय
तीन सीटों पर निर्दलीय MLC
मौजूदा समीकरण पर नजर डालें तो इन आठ सीटों में तीन सीटों पर निर्दलीय विधान पार्षद हैं। दो सीटों पर भाजपा के सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस, भाकपा और जदयू के एक-एक सदस्य का कार्यकाल समाप्त होने वाला है।
ऐसे में चुनाव की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा नजर इस बात पर होगी कि मौजूदा MLC दोबारा मैदान में उतरते हैं या राजनीतिक दल नए चेहरों पर दांव लगाते हैं।
2025 में ही तैयार हो चुकी है मतदाता सूची
इन निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया 2025 में ही पूरी हो चुकी है। संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों ने भी अपने-अपने स्तर पर चुनावी तैयारी शुरू कर दी है।
अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही नामांकन, उम्मीदवारों के चयन और प्रचार को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
चुनाव की घोषणा के बाद बदलेगा राजनीतिक माहौल
बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद अब विधान परिषद की इन 8 सीटों का चुनाव राजनीतिक दलों के लिए एक और अहम परीक्षा माना जा रहा है।
खासकर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों, शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, शिक्षकों की समस्याओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों को चुनावी अभियान में प्रमुखता मिलने की संभावना है।
किसके लिए कितनी बड़ी चुनौती?
इन चुनावों में मौजूदा MLC के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती होगी, वहीं नए दावेदार भी राजनीतिक दलों से टिकट हासिल करने की कोशिश करेंगे।
चुनाव कार्यक्रम जारी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से चेहरे मैदान में उतरते हैं और किन सीटों पर मुकाबला सीधा या त्रिकोणीय बनता है।
