पटना: बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए पुलिस बल के विस्तार की तैयारी तेज हो गई है। राज्य में अगले साल तक करीब 40 हजार नए सिपाहियों के पुलिस बल में शामिल होने की उम्मीद है। इसके बाद बिहार पुलिस की कुल संख्या करीब डेढ़ लाख के आसपास पहुंच सकती है।
वर्तमान में बिहार पुलिस में करीब 1.21 लाख पुलिसकर्मी कार्यरत बताए जा रहे हैं। वहीं, करीब 20 हजार नए सिपाहियों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है और अगस्त 2026 में 19,596 सिपाहियों का प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इन नियुक्तियों के बाद राज्य के पुलिस बल में बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
क्यों बढ़ाई जा रही है पुलिस की संख्या?
बिहार में आबादी के मुकाबले पुलिस बल का अनुपात अभी भी कम है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर प्रति एक लाख आबादी पर औसतन करीब 153 पुलिसकर्मी हैं, जबकि बिहार में यह संख्या लगभग 80 पुलिसकर्मी प्रति एक लाख आबादी बताई गई है।
ऐसे में पुलिस बल की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और आम लोगों को बेहतर पुलिसिंग उपलब्ध कराना है।
19,596 जवानों की ट्रेनिंग शुरू
नई भर्ती के तहत बड़ी संख्या में सिपाहियों को अलग-अलग प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
इनमें 16,656 जिला पुलिस और 2,940 बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बी-सैप) के सिपाही शामिल हैं। प्रशिक्षण के लिए राज्य के जिलास्तरीय पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों के अलावा अन्य विशेष प्रशिक्षण संस्थानों की भी मदद ली जा रही है।
शारीरिक क्षमता के साथ आधुनिक पुलिसिंग की ट्रेनिंग
नए सिपाहियों को सिर्फ शारीरिक प्रशिक्षण ही नहीं दिया जा रहा, बल्कि उन्हें आधुनिक पुलिसिंग की जरूरतों के अनुसार भी तैयार किया जा रहा है।
प्रशिक्षण में पीटी, योग, ड्रिल, यूएसी, दंगा नियंत्रण, हथियार संचालन, फायरिंग, प्राथमिक उपचार और मैप रीडिंग जैसे विषय शामिल हैं।
इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, पुलिस संगठन, पुलिस संचार, यातायात व्यवस्था और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े विषयों की भी जानकारी दी जा रही है।
अलग-अलग प्रशिक्षण केंद्रों में तैयार हो रहे जवान
सिपाहियों के प्रशिक्षण के लिए बिहार के विभिन्न जिलों में मौजूद प्रशिक्षण केंद्रों के साथ-साथ एमपीटीसी डुमरांव और सीआरपीएफ के चंदौली, मोकामा घाट तथा सिलीगुड़ी स्थित प्रशिक्षण केंद्रों की भी मदद ली जा रही है।
इसके अलावा एसएसबी के बगहा, वीरपुर, बथनाहा और सुपौल प्रशिक्षण केंद्रों में भी जवानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कानून-व्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
पुलिस बल में बड़ी संख्या में नए जवानों के शामिल होने से थानों और फील्ड स्तर पर पुलिस की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे गश्त, अपराध नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आपात स्थिति में पुलिस की प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत किया जा सकता है।
सरकार और पुलिस मुख्यालय का जोर केवल संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि जवानों को बेहतर प्रशिक्षण और आधुनिक संसाधनों से लैस करने पर भी है।
पुलिस बल को आधुनिक बनाने पर भी जोर
बिहार सरकार ने पुलिस व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में भी कई कदम उठाए हैं। गृह विभाग की ओर से पुलिस बल बढ़ाने के साथ सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
इसके तहत अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया और पुलिस निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की योजनाएं भी शामिल हैं।
60 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की भी घोषणा
गृह विभाग को लेकर सरकार ने इससे भी बड़ा भर्ती अभियान घोषित किया है। इसके तहत पुलिस के अलावा होमगार्ड और बिहार विशेष सहायक पुलिस (एसएपी) समेत 60 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की योजना बताई गई है।
इसमें 31 हजार पुलिस जवानों के साथ 13,500 होमगार्ड और 17 हजार एसएपी जवानों की भर्ती की घोषणा शामिल है।







