पटना: बिहार में जमीन का लगान लंबे समय से जमा नहीं करने वाले बड़े बकायेदारों पर सरकार ने सख्ती बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के करीब 45 हजार मौजों में 100-100 बड़े लगान बकायेदारों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की है। इन बकायेदारों को उनके मोबाइल नंबर पर SMS के जरिए बकाया लगान जमा करने की सूचना भेजी जाएगी।
45 हजार मौजों में तैयार होगी बकायेदारों की सूची
विभाग की योजना के अनुसार प्रत्येक मौजे में बड़े बकायेदारों की पहचान की जाएगी। इसके बाद संबंधित रैयतों को SMS के माध्यम से उनके बकाया भू-लगान की जानकारी दी जाएगी।
विभाग ने इस संबंध में बिहार स्टेट सेंटर के राज्य सूचना विज्ञान पदाधिकारी को पत्र भेजकर SMS के जरिए सूचना देने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। कई जिलों में बकायेदारों की पहचान और उन्हें संदेश भेजने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है।
मोबाइल पर मिलेगी लगान जमा करने की सूचना
सरकार की कोशिश है कि बकायेदारों तक पहुंचने के लिए पारंपरिक नोटिस प्रक्रिया के साथ डिजिटल माध्यम का भी इस्तेमाल किया जाए। मोबाइल पर SMS मिलने से जमीन मालिकों को उनके बकाये की जानकारी समय पर मिल सकेगी।
बिहार सरकार की आधिकारिक भू-लगान व्यवस्था के जरिए जमीन मालिक ऑनलाइन अपने भू-लगान का भुगतान भी कर सकते हैं।
जमीन के पुराने रिकॉर्ड बन रहे बड़ी चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन के पुराने रिकॉर्ड और जमाबंदी से जुड़ी जानकारी है। राज्य में बड़ी संख्या में जमाबंदी अभी भी पुरानी पीढ़ी के नाम दर्ज है।
कई मामलों में मौजूदा जमीन मालिकों का मोबाइल नंबर जमाबंदी से लिंक नहीं है। ऐसे में सरकार के लिए सही व्यक्ति तक SMS पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से जमाबंदी को आधार और मोबाइल नंबर से जोड़ने का काम भी लगातार किया जा रहा है।
1.82 करोड़ रैयतों की करीब 4.80 करोड़ जमाबंदी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार बिहार में करीब 1.82 करोड़ रैयत हैं और उनके नाम लगभग 4.80 करोड़ जमाबंदियां दर्ज हैं।
सरकार वर्ष 2021 से जमाबंदी को आधार और मोबाइल नंबर से जोड़ने का अभियान चला रही है। हालांकि, पारिवारिक बंटवारा समय पर नहीं होने और पुराने रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने के कारण कई जमाबंदियां अब भी पुरानी पीढ़ी के नाम दर्ज हैं।
जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ियां भी बनी चुनौती
जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल करने की प्रक्रिया में भी कई तरह की विसंगतियां सामने आई हैं। खाता, खेसरा और थाना नंबर जैसी जानकारियों में कथित गलतियों के कारण जमीन मालिकों को रिकॉर्ड सुधार के लिए आवेदन करना पड़ रहा है।
राजस्व महाअभियान के दौरान जमाबंदी में त्रुटि सुधार के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजस्व विभाग के सामने रिकॉर्ड को दुरुस्त करने की चुनौती कितनी बड़ी है।
सिर्फ SMS नहीं, रिकॉर्ड अपडेट करना भी जरूरी
सरकार की नई पहल से बड़े बकायेदारों तक तेजी से पहुंचने में मदद मिल सकती है, लेकिन इसका असर तभी व्यापक होगा जब जमीन के रिकॉर्ड भी सही और अपडेट हों।
मोबाइल नंबर, आधार और जमाबंदी को सही तरीके से जोड़ना जरूरी है, ताकि नोटिस सही जमीन मालिक तक पहुंच सके और राजस्व वसूली की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़े।
लगान वसूली में सरकार सख्त
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग पहले भी बड़े बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दे चुका है। 2025 में विभाग ने अंचल और जिला स्तर पर बड़े बकायेदारों की सूची तैयार करने और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही थी।
अब SMS आधारित सूचना व्यवस्था को इसी अभियान को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।







