पटना: बिहार की राजनीति में जुलाई के अंत में हुए एक बड़े सियासी घटनाक्रम के बाद अब भाजपा नेता देवेश कुमार को नई जिम्मेदारी दी गई है। देवेश कुमार ने 31 जुलाई 2026 को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उनका कार्यकाल मार्च 2027 तक था, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने पद छोड़ दिया। उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने का रास्ता साफ हुआ।
दीपक प्रकाश के लिए खाली हुई MLC सीट
देवेश कुमार राज्यपाल कोटे से मार्च 2021 में विधान परिषद सदस्य बने थे। उनका कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक था। लेकिन दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर उठ रहे संवैधानिक और राजनीतिक सवालों के बीच उन्होंने समय से पहले इस्तीफा दे दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, देवेश के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को मनोनीत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
दीपक प्रकाश को आखिर MLC बनाना क्यों जरूरी हुआ?
दीपक प्रकाश मई 2026 में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में दोबारा मंत्री बने थे, लेकिन उस समय वह विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे।
इसी को लेकर उनके मंत्री पद पर संवैधानिक सवाल उठे और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। बाद में देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई।
राज्यपाल ने दीपक प्रकाश के मनोनयन को दी मंजूरी
देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद सरकार की ओर से खाली सीट पर दीपक प्रकाश के नाम का प्रस्ताव भेजा गया। 5 अगस्त 2026 को राज्यपाल ने दीपक प्रकाश के विधान परिषद सदस्य के रूप में मनोनयन को मंजूरी दे दी। इसके बाद उनका मंत्री पद संवैधानिक रूप से जारी रखने का रास्ता साफ हो गया।
अब देवेश कुमार को मिली नई जिम्मेदारी
विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के बाद भाजपा ने देवेश कुमार को संगठन में नई जिम्मेदारी दी है। देवेश कुमार भाजपा के मिजोरम प्रभारी भी रहे हैं और पार्टी संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इस घटनाक्रम से साफ है कि विधान परिषद की सीट छोड़ने के बावजूद पार्टी ने देवेश कुमार को संगठन से अलग नहीं किया, बल्कि उन्हें नई भूमिका के साथ राजनीतिक जिम्मेदारी में बनाए रखा।
देवेश कुमार का राजनीतिक सफर
समस्तीपुर जिले के रहने वाले देवेश कुमार पहले पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं। मार्च 2021 में उन्हें राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद का सदस्य बनाया गया था।
पिछले कुछ वर्षों में वे बिहार भाजपा के संगठनात्मक कामकाज में सक्रिय रहे हैं और पार्टी के मिजोरम प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
इस्तीफे के बाद सियासत भी हुई तेज
देवेश कुमार के इस्तीफे को लेकर बिहार की राजनीति में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। विपक्षी नेताओं और कुछ राजनीतिक चेहरों ने सवाल उठाया कि दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने के लिए देवेश कुमार को ही सीट क्यों छोड़नी पड़ी।
वहीं, भाजपा की ओर से इसे संगठनात्मक और राजनीतिक प्रक्रिया के रूप में देखा गया।
अब आगे क्या?
दीपक प्रकाश के विधान परिषद सदस्य बनने के बाद उनके मंत्री पद को लेकर चल रही संवैधानिक चर्चा काफी हद तक समाप्त हो गई। दूसरी ओर, देवेश कुमार के लिए पार्टी की नई जिम्मेदारी यह संकेत देती है कि भाजपा संगठन में उनकी भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।







