पटना: बिहार सरकार ने राजनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण नियुक्तियां करते हुए राज्य 20 सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति में तीन नेताओं को सदस्य बनाया है। इसके साथ ही बिहार राज्य नागरिक परिषद में भी नई नियुक्तियां की गई हैं। इन नियुक्तियों में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बॉडीगार्ड रह चुके एक व्यक्ति को नागरिक परिषद में जगह मिलना खास चर्चा में है।
तीन नेताओं को 20 सूत्री कमेटी में मिली जिम्मेदारी
सम्राट चौधरी सरकार की ओर से राज्य 20 सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति में तीन नेताओं को सदस्य बनाया गया है। यह समिति सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
नई नियुक्तियों को सरकार की ओर से संगठन और प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के तौर पर देखा जा रहा है।
नागरिक परिषद में भी हुई नियुक्ति
राज्य 20 सूत्री कमेटी के अलावा बिहार राज्य नागरिक परिषद में भी नियुक्तियां की गई हैं। इनमें नीतीश कुमार के पूर्व बॉडीगार्ड को जगह मिलना राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
नागरिक परिषद के माध्यम से सरकार और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद को मजबूत करने तथा जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने में मदद मिलती है।
नीतीश कुमार के पूर्व बॉडीगार्ड को मिली जगह
नई नियुक्तियों में सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के पूर्व बॉडीगार्ड को नागरिक परिषद में शामिल किए जाने को लेकर है। लंबे समय तक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े रहे व्यक्ति को अब परिषद में जिम्मेदारी मिलने से यह नियुक्ति खास बन गई है।
हालांकि, इस नियुक्ति को लेकर सरकार की ओर से विस्तृत कारण या भूमिका का विवरण अलग से सामने आना बाकी है।
क्या है 20 सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति?
20 सूत्री कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी और विकास योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना और उनके क्रियान्वयन की निगरानी करना है।
राज्य स्तर पर गठित समिति योजनाओं की प्रगति, विकास कार्यों और सरकारी कार्यक्रमों के प्रभाव की समीक्षा में भूमिका निभाती है।
राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर बढ़ी चर्चा
बिहार में सरकार गठन के बाद अलग-अलग बोर्ड, निगम, समितियों और परिषदों में नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। ऐसे में 20 सूत्री कमेटी और नागरिक परिषद में नई नियुक्तियों को भी इसी क्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन नियुक्तियों से संबंधित नेताओं और कार्यकर्ताओं को सरकार के साथ काम करने का अवसर मिलेगा।
