पटना: बिहार में बाढ़, सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति देने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र सरकार से करीब 11,000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की मांग की है। दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने बिहार से जुड़ी कई लंबित और प्रस्तावित जल परियोजनाओं को जल्द आगे बढ़ाने का मुद्दा उठाया।
बैठक में उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। सरकार का जोर खासतौर पर बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई क्षमता बढ़ाने और नेपाल से आने वाली नदियों के कारण हर साल होने वाले नुकसान को कम करने पर है।
कोसी-मेची लिंक परियोजना के लिए जल्द राशि जारी करने की मांग
मुख्यमंत्री ने कोसी-मेची लिंक परियोजना के पहले चरण में धीमी वित्तीय प्रगति का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
करीब 3,652.56 करोड़ रुपये की इस परियोजना के पहले चरण के लिए 965.41 करोड़ रुपये निर्धारित हैं, लेकिन अब तक 156.745 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने शेष राशि जल्द जारी करने के साथ-साथ परियोजना के दूसरे चरण के DPR को मंजूरी देने का भी अनुरोध किया।
पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के लिए भी केंद्र से मदद
बैठक में पश्चिमी कोसी नहर परियोजना का मामला भी उठाया गया। इस परियोजना के DPR की अनुमानित लागत करीब 8,338.89 करोड़ रुपये बताई गई है।
बिहार सरकार ने इसका पहला चरण अपने संसाधनों से शुरू किया है। अब राज्य सरकार चाहती है कि केंद्र से आवश्यक आर्थिक सहयोग मिले, जिससे परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
इन परियोजनाओं को केंद्रीय बजट में शामिल करने की मांग
मुख्यमंत्री ने इंद्रपुरी जलाशय योजना, सोन-फल्गु रिवर लिंक परियोजना और सारण बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी परियोजना को केंद्रीय बजट 2026-27 में शामिल करने की मांग रखी।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ बाढ़ और जल निकासी की समस्या को कम करने में भी मदद मिलेगी।
कोसी हाई डैम और नेपाल से जुड़ी परियोजनाओं पर भी जोर
बैठक में नेपाल से जुड़ी कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना को भी गति देने की मांग की गई।
मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं से जुड़े सर्वेक्षण और DPR तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। बिहार के लिए ये परियोजनाएं इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं क्योंकि नेपाल से आने वाली नदियों के कारण उत्तर बिहार में हर साल बाढ़ का खतरा बना रहता है।
बांग्लादेश जल समझौते में बिहार के हितों की चिंता
बैठक के दौरान बांग्लादेश के साथ जल समझौते के नवीनीकरण का मुद्दा भी सामने आया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी नए समझौते में बिहार के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
इसके साथ ही बिहार की नदियों में जमा होने वाली गाद की समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाने की मांग भी रखी गई।
FMBAP का बजट बढ़ाने की मांग
मुख्यमंत्री ने Flood Management and Border Areas Programme (FMBAP) के तहत बिहार के लिए केंद्रीय बजटीय प्रावधान बढ़ाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बिहार देश के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित राज्यों में शामिल है और राज्य का बड़ा हिस्सा हर साल बाढ़ की चपेट में आता है। गंगा, कोसी और बागमती जैसी नदियों के कारण बड़ी आबादी प्रभावित होती है। ऐसे में बाढ़ नियंत्रण के लिए राज्य को अधिक केंद्रीय सहायता की आवश्यकता है।
सरकार का फोकस- बाढ़ से स्थायी राहत और बेहतर जल प्रबंधन
बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ को देखते हुए सरकार अब केवल तत्काल राहत के बजाय स्थायी जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं पर जोर दे रही है।
यदि केंद्र से प्रस्तावित वित्तीय सहायता और परियोजनाओं को मंजूरी मिलती है, तो कोसी-मेची लिंक, पश्चिमी कोसी नहर, कोसी हाई डैम और अन्य योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।







