पटना: बिहार में आरक्षण को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा को लेकर रोहिणी आचार्य के बयान के बाद अब इमामगंज की विधायक दीपा मांझी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि गरीब और वंचित वर्गों को सिर्फ उपदेश नहीं, बल्कि उनका हक और उचित हिस्सेदारी चाहिए।
रोहिणी आचार्य ने आरक्षण की समीक्षा पर उठाया सवाल
दरअसल, रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा था कि जब तक समाज में सामाजिक और आर्थिक गैर-बराबरी बनी हुई है, तब तक आरक्षण व्यवस्था की किसी भी तरह की समीक्षा उचित नहीं है। उनके इसी बयान के बाद बिहार की राजनीति में इस मुद्दे पर बहस और तेज हो गई।
दीपा मांझी ने कहा- ‘हमें ज्ञान नहीं, हक चाहिए’
रोहिणी आचार्य के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपा मांझी ने कहा कि गरीब और वंचित वर्गों की समस्याओं को समझना जरूरी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि “हमें ज्ञान नहीं चाहिए, हक चाहिए। उपदेश नहीं चाहिए, हिस्सा चाहिए।”
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आजादी के इतने वर्षों बाद भी समाज के कई वर्ग शिक्षा, रोजगार और प्रतिनिधित्व में पीछे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि आरक्षण का लाभ आखिर किन लोगों तक पहुंच रहा है।
‘अपने कोटे में कोटा’ की मांग पर जोर
दीपा मांझी ने आरक्षण के भीतर अधिक वंचित वर्गों की हिस्सेदारी की मांग को फिर से सामने रखा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि उन वर्गों तक अवसर और प्रतिनिधित्व पहुंचाना है जो अब भी सबसे पीछे हैं।
उन्होंने “जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” की बात कहते हुए अपने कोटे में कोटा देने की मांग का समर्थन किया।
आरक्षण को संवैधानिक अधिकार बताया
दीपा मांझी ने कहा कि आरक्षण किसी की कृपा नहीं, बल्कि सामाजिक और ऐतिहासिक वंचना के खिलाफ मिला संवैधानिक अधिकार है। उनके अनुसार, अब बहस केवल आरक्षण को बनाए रखने या हटाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि इसका लाभ समाज के सबसे पिछड़े लोगों तक किस तरह पहुंचे।
रोहिणी आचार्य पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की
दीपा मांझी ने अपने बयान में रोहिणी आचार्य और उनके राजनीतिक परिवार पर तीखी व्यक्तिगत टिप्पणियां भी कीं। उन्होंने कहा कि आरक्षण और सामाजिक न्याय पर सवाल उठाने के बजाय उनके उठाए गए सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
उन्होंने अपने बयान में संपत्ति और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, इन बयानों को राजनीतिक आरोप और प्रत्यारोप के रूप में देखा जाना चाहिए।
‘अब आंकड़ों पर जवाब चाहिए’
दीपा मांझी ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर अब केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि आंकड़ों के आधार पर जवाब चाहिए। उन्होंने गरीबों और वंचित वर्गों को उनका अधिकार और हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था बनी रहनी चाहिए, लेकिन उसका लाभ समाज में सबसे पीछे खड़े व्यक्ति तक भी पहुंचना चाहिए।
बिहार में आरक्षण पर बढ़ी सियासी बहस
बिहार में आरक्षण के भीतर आरक्षण और वंचित वर्गों की हिस्सेदारी का मुद्दा पहले से ही राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। जीतन राम मांझी और संतोष सुमन की ओर से भी इस मुद्दे को उठाया जाता रहा है। अब दीपा मांझी के बयान के बाद रोहिणी आचार्य के साथ उनका सियासी टकराव इस बहस को और चर्चा में ले आया है।







