पटना: फैमिली पेंशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पटना हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने एक महिला के फैमिली पेंशन दावे को खारिज करने वाले वर्ष 2019 के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले के तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करते हुए नए सिरे से और तर्कपूर्ण आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला जल संसाधन विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत एक सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद फैमिली पेंशन के दावे से जुड़ा है। कर्मचारी की मृत्यु 17 अप्रैल 2009 को हुई थी।
इसके बाद खुद को मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी बताने वाली महिला ने फैमिली पेंशन के लिए दावा किया। महिला के अनुसार, उनके छह बच्चे हैं और पति की मृत्यु के बाद पेंशन ही उनके और परिवार के लिए आर्थिक सहारा थी।
हालांकि, विभाग ने यह कहते हुए उनका दावा खारिज कर दिया कि पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करने से पहले कर्मचारी ने सक्षम अधिकारी से आवश्यक अनुमति नहीं ली थी।
कोर्ट के सामने सामने आया 1982 का अहम दस्तावेज
सुनवाई के दौरान मामले में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार, मृत कर्मचारी ने 28 फरवरी 1982 को दूसरी शादी की अनुमति के लिए विभाग में आवेदन दिया था।
हाईकोर्ट ने पाया कि पेंशन दावे को खारिज करते समय अधिकारियों ने इस आवेदन पर उचित विचार नहीं किया। अदालत ने माना कि केवल अनुमति नहीं मिलने के आधार पर दावा खारिज करने से पहले इस महत्वपूर्ण तथ्य की जांच जरूरी थी।
पहली पत्नी की मृत्यु के बाद भी जारी रहा पारिवारिक जीवन
महिला की ओर से अदालत में बताया गया कि पहली पत्नी की कोई संतान नहीं थी और उसने दूसरी शादी पर आपत्ति नहीं जताई थी। रिकॉर्ड के अनुसार पहली पत्नी की मृत्यु दिसंबर 2009 में हुई।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि याचिकाकर्ता और मृत कर्मचारी लंबे समय तक साथ रहे और उनके छह बच्चे हुए। कोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए महिला के पेंशन दावे पर दोबारा विचार करने को कहा।
कोर्ट ने कहा- महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की अदालत ने 25 अगस्त को मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि मृत कर्मचारी और याचिकाकर्ता लंबे समय तक साथ रहे तथा एक-दूसरे की देखभाल करते रहे।
अदालत ने माना कि मामले के सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए महिला के दावे पर विचार किया जाना चाहिए। पहली पत्नी की मृत्यु के बाद महिला को जीवनसाथी के रूप में मिले अधिकारों पर भी मामले की परिस्थितियों के अनुसार विचार करना होगा।
2019 का सरकारी आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द
हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर स्थित बाढ़ नियंत्रण एवं जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता द्वारा 5 फरवरी 2019 को पारित आदेश को रद्द कर दिया।
उस आदेश के जरिए महिला का फैमिली पेंशन दावा खारिज किया गया था। हाईकोर्ट ने अब संबंधित अधिकारी को मामले के सभी महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों की समीक्षा कर नया एवं कारणयुक्त आदेश जारी करने का निर्देश दिया है।
2009 से पेंशन के दावे पर होगा विचार
कोर्ट के आदेश में यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता अपने पति की मृत्यु की तारीख 17 अप्रैल 2009 से अपनी मृत्यु तक फैमिली पेंशन की हकदार थी।
अब संबंधित विभाग को हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार मामले की दोबारा समीक्षा कर कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करनी होगी।
सरकारी विभागों के लिए क्या है संदेश?
इस फैसले से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि पेंशन जैसे मामलों में सरकारी अधिकारियों को केवल तकनीकी आधार पर निर्णय लेने के बजाय रिकॉर्ड में उपलब्ध सभी महत्वपूर्ण तथ्यों और दस्तावेजों पर उचित विचार करना होगा।
इस मामले में हाईकोर्ट ने विशेष रूप से उस दस्तावेज को महत्व दिया जिसे पहले के प्रशासनिक निर्णय में नजरअंदाज कर दिया गया था।
