पटना: बिहार सरकार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने की दिशा में बड़े अभियान की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में प्रस्तावित इस अभियान के तहत बड़ी आबादी की स्वास्थ्य जांच कराने और गंभीर बीमारियों की शुरुआती स्तर पर पहचान करने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं को केवल अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय लोगों के घर और समुदाय के स्तर तक पहुंचाना है।
घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य टीम
इस अभियान के तहत स्वास्थ्यकर्मी अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों की स्क्रीनिंग करेंगे। खासकर ऐसे लोगों की पहचान पर जोर रहेगा, जिन्हें किसी बीमारी के शुरुआती लक्षण हैं लेकिन अभी तक उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र में जांच नहीं कराई है।
घर-घर स्क्रीनिंग से समय रहते बीमारी की पहचान होने पर मरीजों को आगे की जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्रों से जोड़ा जा सकेगा।
8 प्रमुख बीमारियों की होगी जांच
अभियान के दौरान कई गंभीर और आम बीमारियों की स्क्रीनिंग पर ध्यान दिया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अभियान में 8 प्रमुख बीमारियों की जांच को शामिल किया गया है।
इसका उद्देश्य लोगों में बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में करना और जरूरत के अनुसार उन्हें आगे के उपचार से जोड़ना है।
इलाज से पहले बीमारी की पहचान पर जोर
सरकार की योजना केवल जांच तक सीमित नहीं है। स्क्रीनिंग के दौरान किसी व्यक्ति में बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पाए जाने पर उसे संबंधित स्वास्थ्य केंद्र अथवा विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।
इससे ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को घर के करीब पहुंचाने की कोशिश
बिहार में बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। ऐसे में कई लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना आसान नहीं होता।
घर-घर स्क्रीनिंग की व्यवस्था से ऐसे लोगों को प्राथमिक स्तर पर ही स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिल सकती है। इससे बीमारी का पता चलने में देरी को कम करने में मदद मिलेगी।
गंभीर बीमारियों का बोझ कम करने की कोशिश
कई बीमारियों में शुरुआती जांच और समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। बीमारी का पता देर से चलने पर उपचार अधिक जटिल और महंगा हो सकता है।
सरकार का यह अभियान इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए प्रिवेंटिव हेल्थकेयर यानी बीमारी से पहले उसकी पहचान और रोकथाम पर जोर देता है।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका होगी अहम
अभियान को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।
स्क्रीनिंग के बाद संदिग्ध मरीजों का रिकॉर्ड तैयार करना, उनकी दोबारा जांच कराना और जरूरत पड़ने पर इलाज से जोड़ना अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
सरकार का फोकस- जांच, पहचान और उपचार
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के साथ-साथ बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार पर जोर दे रही है।
अगर अभियान को व्यापक स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की पहचान हो सकती है जिन्हें अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में पहले जानकारी नहीं थी।







