पटना: बिहार में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को व्यवस्थित दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य के 43 प्रमुख शहरों में अगले एक साल के भीतर मास्टर प्लान लागू करने की योजना है। सरकार का फोकस शहरों के अनियोजित विस्तार को रोकने के साथ सड़क, यातायात, जल निकासी, आवास, कचरा प्रबंधन और अन्य शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर है।
सरकार की योजना में शहरों के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू करने के बजाय उनकी स्थानीय जरूरत, आबादी, भौगोलिक स्थिति और भविष्य की विकास संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग मास्टर प्लान तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
43 शहरों के लिए तैयार होगा मास्टर प्लान
राज्य के जिला मुख्यालयों के साथ सोनपुर और बगहा समेत कुल 43 प्रमुख शहरों को योजनाबद्ध शहरी विकास के दायरे में लाने की तैयारी है।
मास्टर प्लान के जरिए यह तय किया जाएगा कि आने वाले वर्षों में शहर का विस्तार किस दिशा में होगा, कहां आवासीय क्षेत्र विकसित होंगे, किन इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां होंगी और कहां सड़क, परिवहन तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के लिए जगह सुरक्षित रखी जाएगी।
‘वन साइज फिट्स ऑल’ नहीं, शहर के हिसाब से बनेगी योजना
सरकार की सोच है कि बिहार के सभी शहरों की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। किसी शहर में यातायात बड़ी समस्या है, तो किसी शहर में जलजमाव, सीवरेज या अनियोजित निर्माण चुनौती बना हुआ है।
इसी वजह से मास्टर प्लान तैयार करते समय हर शहर की अपनी जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जा रहा है।
इससे विकास योजनाओं को स्थानीय जरूरत के मुताबिक लागू करने और भविष्य में होने वाली समस्याओं को पहले से ध्यान में रखने में मदद मिल सकती है।
बिना नक्शा पास कराए निर्माण पर लगेगी रोक
मास्टर प्लान लागू होने के बाद शहरों में निर्माण गतिविधियों को भी ज्यादा व्यवस्थित करने की योजना है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वीकृत नक्शे के बिना निर्माण पर रोक लगाने की दिशा में भी व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
इसका उद्देश्य अवैध और अनियोजित निर्माण पर नियंत्रण करना तथा शहर के नियोजित विकास को सुनिश्चित करना है।
सड़क, ट्रैफिक और जल निकासी पर रहेगा फोकस
मास्टर प्लान में शहर की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क नेटवर्क, यातायात व्यवस्था, जल निकासी, आवासीय क्षेत्र और अन्य शहरी सुविधाओं को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने पर जोर रहेगा।
योजना का उद्देश्य केवल नए निर्माण कराना नहीं, बल्कि शहर के मौजूदा ढांचे को भी भविष्य की आबादी और जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
छह महीने में 23 नागरिक सेवाएं ऑनलाइन करने की तैयारी
शहरी विकास के साथ नागरिक सेवाओं को डिजिटल बनाने पर भी सरकार का जोर है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले छह महीनों में 23 प्रमुख नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन करने का लक्ष्य रखा गया है।
इससे लोगों को नक्शा पास कराने और अन्य नगर निकाय संबंधी सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है।
143 नगर निकायों में कचरा प्रबंधन पर जोर
राज्य के 143 नगर निकायों में ठोस कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने की योजना भी तैयार की जा रही है। सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में शहरों में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था को मजबूत करना है।
इसके तहत कचरे के संग्रहण से लेकर उसके प्रसंस्करण और निस्तारण तक पूरी व्यवस्था को व्यवस्थित करने पर जोर रहेगा।
नगर निकायों के वित्तीय प्रबंधन पर भी निगरानी
नगर निकायों में वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑडिट व्यवस्था को मजबूत करने की भी बात कही गई है। इसका उद्देश्य सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाना है।
आने वाले वर्षों में बदलेगा बिहार का शहरी स्वरूप
मास्टर प्लान, ऑनलाइन नागरिक सेवाओं और बेहतर कचरा प्रबंधन जैसी योजनाओं के जरिए सरकार बिहार के शहरों को अधिक सुव्यवस्थित, आधुनिक और नागरिक सुविधाओं के लिहाज से बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
अब सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को कागज से निकालकर जमीन पर समयबद्ध तरीके से लागू करने की होगी।







