पटना: बिहार की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी ने NDA सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को आरक्षण को लेकर बयानबाजी करने के बजाय बेरोजगारी और युवाओं के पलायन जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
सहनी ने कहा कि बिहार के युवाओं के सामने रोजगार सबसे बड़ी चुनौती है। बड़ी संख्या में युवा बेहतर रोजगार और अवसरों की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को रोजगार के नए अवसर पैदा करने और पलायन रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
आरक्षण पर राजनीति नहीं, रोजगार पर हो चर्चा
मुकेश सहनी ने कहा कि आरक्षण सामाजिक न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है, लेकिन इसके नाम पर केवल राजनीतिक बयानबाजी करने से युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि बिहार के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार, शिक्षा और आर्थिक अवसर कब मिलेंगे।
बेरोजगारी को बताया बड़ी चुनौती
सहनी के अनुसार बिहार में बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि राज्य में उद्योग, रोजगार और स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है।
उन्होंने सरकार से रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने की मांग की।
पलायन रोकने के लिए बने ठोस नीति
VIP प्रमुख ने कहा कि बिहार से होने वाले पलायन को केवल राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय इसके स्थायी समाधान पर काम करना चाहिए।
उनके मुताबिक राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने, छोटे कारोबारियों और युवाओं को आर्थिक सहायता देने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की जरूरत है। इससे युवाओं को अपने ही राज्य में काम करने का अवसर मिल सकता है।
युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार से सवाल
मुकेश सहनी ने कहा कि बिहार के विकास का सीधा संबंध यहां के युवाओं के भविष्य से है। अगर युवाओं को रोजगार और बेहतर अवसर मिलेंगे तो राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
उन्होंने NDA सरकार से युवाओं, रोजगार और पलायन को लेकर स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की मांग की।
आरक्षण का मुद्दा भी बना सियासी बहस का केंद्र
बिहार में आरक्षण का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। मुकेश सहनी इससे पहले भी निषाद समाज के आरक्षण को लेकर मुखर रहे हैं। हालिया बयानों में उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को राजनीतिक दबाव का संदेश भी दिया है।
ऐसे में उनका ताजा बयान आरक्षण की राजनीति को बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
